ललितपुर। आचार्य आर्जव सागर महाराज ने उत्तम तप दिवस पर देते हुए कहा कि तपाने से जैसे अशुद्ध वस्तु शुद्ध होती है, उसी तरह अपनी आत्मा को तप के माध्यम से जब तपाते हैं तो जीवन में निखार और परिणामों में निर्मलता आती है।
दि जैन मंदिर क्षेत्रपाल परिसर में उन्होंने बताया कि इंद्रिय विषयों पर विजय को जीतना ही सच्ची साधना है, तप के माध्यम से आत्मा निर्मल होती है।
इसके पहले आज प्रात:काल आचार्य एवं संघस्थ मुनि महान सागर, मुनि भाग्य सागर, मुनि महत्त सागर, मुनि विलोक सागर, मुनि विवोध सागर, मुनि विदित सागर, मुनि विभोर सागर महाराज के समक्ष तत्वार्थ सूत्र का वाचन संध्या एवं भारती जैन द्वारा हुआ, जिसमें अर्घ सुधा कलश महिला ंडल द्वारा अर्पित किए गए। इस मौके पर पूर्व प्रबंधक महेन्द्र मडवैया द्वारा पर्युषण पर्व के दौरान 6 उपवास करने पर आचार्य श्री को श्रीफल अर्पित किया। मध्यान्ह में आचार्य श्री ने संघस्थ मुनि को जैन धर्म का मर्म तत्वार्थ सूत्र के वाचन द्वारा बताया। दयोदय पशुसंरक्षण केन्द्र गौशाला में विराजमान श्रमण मुनि सुप्रभ सागर ने उत्तम तप धर्म को बताते हुए कहा शरीर को संयत करते हुए मन में उठी इच्छाओं का निरोध करना सम्यक तप माना गया है, इसमें जरा प्रतिकूलता कठिनाई महसूस होती है।
आदिनाथ मंदिर नईवस्ती में शिष्य मुनि विनिश्चल सागर महाराज ने कहा कि संयम की सिद्धि राग का उच्छेद कर्मों का नाश ध्यान और आगम की प्राप्ति के लिए तप धारण किया जाता है। उन्होंने कहा कि तप धर्म की महिमा को समझकर हमें सिर्फ उसकी पूजा प्रसंशा और जयजयकार नहीं करना बल्कि उस मार्ग पर आगे बढना होगा।
आनलाइन मंगलाचरण प्रतियोगिता शुरू
सुधाकलश महिला मण्डल के तत्वावधान में आचार्य आर्जव सागर महाराज के सानिध्य में आनलाइन मंगेलाचरण प्रतियोगिता शुरू हुई। इसमें महिला मण्डल की प्रमुख सुधा सिमरा एवं सुषमा जैन ने बताया कि तीन आयुवर्ग जो क्रमश: 8 वर्ष तक, 9 से 15 वर्ष एवं 16 वर्ष से अधिक के प्रतिभागी आनलाइन सम्मिलित होंगे, जिन्हें मंगलाचरण की वीडियो एवं लिखित रूप से व्हाट्सअप पर देना होगा। प्रतियोगिता का परिणाम 6 सितम्बर को घोषित किया जाएगा।