संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। महुआ के बाद अब तेंदू पत्ता तोड़ने का सीजन प्रारंभ हो गया है। गर्मी के चलते लोग सुबह ही जंगलों में तेंदू पत्ता तोड़ने जाते हैं, जिससे तेज धूप से पहले लौट आएं। सुबह के समय जंगली जानवर भी भ्रमण करते हैं और वह ग्रामीणों पर हमला कर देते हैं। एक पखवाड़े में दो जगहों पर भालू के हमले से ग्रामीण घायल हो चुके हैं। इससे उनमें दहशत का माहौल है। वह जंगल में जाने से कतरा रहे हैं। तेंदू पत्ता की तुड़ाई नहीं हुई तो वन निगम को काफी घाटा होगा। वन विभाग की टीम ने जंगल से सटे गांवों में जागरुकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
रविवार तड़के पारौल के एक ग्रामीण पर भालू ने हमला कर दिया था। प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी गौतम सिंह उसके गांव पहुंचे और परिवार से बातचीत की। साथ ही जंगल का मुआयना किया। उन्होंने कहा कि जल्द जंगलों में ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे भालुओं की सही लोकेशन प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि विभाग भालुओं पर विस्तृत अध्ययन करेगा, उनके स्वभाव व गतिविधियों को रिकॉर्ड कर आलाधिकारियों को सूचित कर विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाएगी। जिससे जंगलों के आसपास रहने वालों को आगाह किया जा सके। उन्होंने बताया कि जंगलों में जो भालू हैं, वे मानव जाति को देखकर आक्रामक हो जाते हैं। उन्होंने ग्रामीणों को दिन के उजाले में ही जंगलों में जाने की सलाह दी।
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तेंदू पत्ता तोड़ने के लिए जंगलों में जाने से कतरा रहे ग्रामीण
जंगलों में तेंदू पत्ता तुड़ान प्रारंभ हो चुका है। 20 से 25 दिन ही तुड़ान चलेगा। इस बीच में तेंदू पत्ते को नहीं तोड़ा गया तो पत्ता खराब हो जाएगा, जिसका उपयोग बीड़ी बनाने में नहीं किया जा सकेगा। ऐसे में वन विभाग ग्रामीणों को दिन के उजाले में पत्ता तोड़ने की सलाह दे रहा है।