पांडव वन धाम में भागवत कथा सुनाती कथा व्यास प्रिया देवी व राजेन्द्र दास महाराज
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डोंगराखुर्द (ललितपुर)। पांडव वन स्थित श्री हनुमान जी महाराज मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास ने पूतना वध की कथा सुनाई। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कथा व्यास प्रिया देवी व राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि जैसे ही वासुदेव नंद बाबा के यहां भगवान श्रीकृष्ण को छोड़कर आए, वहां खुशियां मनाई जाने लगीं। नंद बाबा ने ब्राह्मणों को बुलवाकर धन धान्य के साथ लाखों की संख्या में गायों को दान में दे दिया। ब्राह्मणों को बुलवाकर नामकरण, जाति कर्म संस्कार कराए गए। इधर खुशियां मन रहीं थीं कि उधर कंस का नंद बाबा के लिए वार्षिक कर देने को बुलावा आता है और वह कर चुकाने चल देते हैं। कंस ने अपनी मुंह बोली बहन और बकासुर की बहन बकी, जिसे पूतना के नाम से जानते हैं, उसे बुलवाया। पूतना बहुत बलवान थी। राजा कंस ने गोकुल में जन्मे सभी बच्चों के साथ नंद बाबा के यहां जन्मे बालक को मारने के लिए भेजा। बधाई गीत सुनकर पूतना समझ गई कि इसी घर में पूत ने जन्म लिया है। वह नंदबाबा के महल में पहुंची और सुंदर स्त्री का रूप धारण कर गोपियों के साथ महल में प्रवेश कर गई। यशोदा मैया को रिश्ते में मौसी बताकर बधाई देने लगी।
पूतना ने बधाई देते हुए सोते श्रीकृष्ण को गोंद में उठा लिया और अपना दूध पिलाने लगी। पूतना के अपने स्तनों में कालकूट नाम का विष लगा रखा था, जिसका पान करते ही कोई बच नहीं सकता था। भगवान श्रीकृष्ण सब जान गए की यह पूतना राक्षसी है। वह क्रोध से लाल हो गए और वह दुग्धपान करने लगे। दुग्धपान से पूतना को मर्म पीड़ा होने लगी। चीख पुकार करने लगी। भयंकर स्वर से गर्जना से पृथ्वी व आकाश गूंज उठे। पूतना भूमि पर गिर पड़ी। जब यशोदा, रोहिणी और गोपियों ने देखा बालक श्रीकृष्ण सीने पर लेटे हुए स्तनपान कर रहे हैं तो यशोदा मैया ने श्रीकृष्ण को उठाकर सीने से लगा लिया और गोकुलवासियों ने राक्षसी पूतना को जला दिया।
कथा सुनने के बाद मंदिर परिसर में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पांडव वन पहुंचकर हनुमान जी महाराज के दर्शन कर रहे हैं।
पांडव वन धाम में लगा मेला- फोटो : LALITPUR
पंडवन में भगवत कथा सुनते श्रद्धालु- फोटो : LALITPUR