ललितपुर। हाईकोर्ट के फैसले के बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की परिस्थितियां ही बदल गई हैं। नए सिरे से सीटों के आरक्षण का किए जाने की मंजूरी सरकार से मिलते ही ग्राम पंचायतों में नए दावेदार उभरने लगे हैं। जिन लोगों ने चुनाव में उतरने की उम्मीद छोड़ दी थी, उनमें नई उमंग नजर आ रही है। इससे ग्राम पंचायतों में चुनावी माहौल एक बार फिर बनने लगा है।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक पंचायतों में आरक्षण और चुनाव कराने से संबंधित प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। अब सरकार 2015 को आधार वर्ष मानकर पंचायतों के चक्रानुक्रम आरक्षण के लिए सरकार राजी हो गई है। इससे पूर्व में सीटों के लिए तय किए आरक्षण के बदलने की संभावना बढ़ गई है। जिन ग्राम पंचायतों में आरक्षण को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही थी, वहां आरक्षण के अनुसार संभावित दावेदारों ने स्थानीय लोगों के बीच प्रचार प्रसार कर शुरू कर दिया था। लेकिन, जब से वर्ष 2015 को आधार मानकर आरक्षण तय करने की सुगबुगाहट आरंभ हुई, वैसे ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रचार में जुटे संभावित दावेदारों का जोश ठंडा पड़ गया और कुछ नए दावेदारों ने अपनी ताल ठोक दी है। ऐसे उम्मीदवारों को अपने अनुकूल आरक्षण होने की उम्मीद जाग गई है। इससे ग्राम पंचायत से लेकर क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत की सीटों पर चुनाव का अलग ही माहौल दिखाई देने लगा है। कई संभावित उम्मीदवार को अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए क्षेत्र जनता को खुश करने में लगे थे, उनमें से कई अन्य कार्यों में व्यस्त हो गए हैं। कुछ ही दावेदार ऐसे बचे हैं, जिन्होंने अभी अपना हौसला नहीं खोया है और निरंतर जनता के बीच में बने हुए हैं। चुनावी पंडितों का कहना है कि सीटों के आरक्षण की प्रक्रिया को और समय मिल गया है, इससे संभावित दावेदारों का खर्चा बढ़ता दिख रहा है। वह जानते हुए भी जनता की नाराजगी मौल नहीं लेना चाहते हैं। इस तरह वह लोगों की फरमाइशें पूरी करने के लिए विवश हैं।
फिलहाल अफसरों को मिली राहत
नए सिरे से सीटों के आरक्षण की प्रक्रिया को अपनाने के लिए अफसरों को फिलहाल समय मिल गया है। इससे अफसरों ने राहत की सांस ली है। वरना, पिछले दिनों प्रस्तावित आरक्षण पर आई आपत्तियों का निस्तारण उनके लिए चुनौती बन गया था।