ललितपुर। पाली कस्बे में पांच साल बाद भी घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने की 21.50 करोड़ रुपये की परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। जल निगम के सर्वे में 2500 परिवारों की 12 हजार की आबादी को पानी के संकट से जूझना पड़ रहा था। योजना में दो टंकियां, दो स्वच्छ जलाशय और दो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित थे, लेकिन कच्चे पानी के स्रोत और वन विभाग की एनओसी का पेच फंसने से परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। फिलहाल नगर पंचायत बोर कराकर 70 से 80 फीसदी आबादी को पानी उपलब्ध करा रही है।
परियोजना के लिए बंदरगुढ़ा से कच्चा पानी उठाने की योजना थी। इसके लिए पाइपलाइन बिछाने को वन विभाग से एनओसी की जरूरत थी, लेकिन अनुमति नहीं मिल सकी। इसके बाद गोविंद सागर बांध से पानी लेने की कवायद शुरू हुई। विभागीय स्तर पर कम पानी उपलब्ध होने का हवाला दिए जाने के बाद यह विकल्प भी आगे नहीं बढ़ सका। इसके चलते पेयजल परियोजना प्रस्ताव और कार्ययोजना तक ही सीमित रह गई।
बोर से 70 से 80 फीसदी आबादी को पानी
नगर पंचायत स्तर पर पेयजल आपूर्ति के लिए सीडब्ल्यूआर और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी हुई। बाद में गोविंद सागर बांध और सजनाम से पानी लेने की वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया गया। इसके लिए जमीन उपलब्ध हो गई, लेकिन एनओसी नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो सका।
नगर पंचायत ने फिलहाल बोर कराकर पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल आपूर्ति शुरू की है। नगर पंचायत अध्यक्ष के अनुसार इससे करीब 70 से 80 फीसदी लोगों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, बाकी परिवारों को अब भी पेयजल के लिए अन्य संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
कोट
नगर पंचायत में पेयजल आपूर्ति का सर्वे किया गया। सीडब्ल्यूआर व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन मांगी गई। जमीन उपलब्ध होने के बाद वन विभाग से एनओसी बाधा बन गई। दूसरी व्यवस्था गोविंद सागर बांध व सजनाम से की जा रही थी। इसके लिए दूसरी ओर जमीन मांगी गई, जो मिल गई थी। लेकिन, एनओसी न मिलने से कार्य नहीं हो सका। नगर पंचायत ने बोर कराकर लाइन बिछाकर सप्लाई की है। इससे 70 से 80 फीसदी लोगों को पानी दिया जा रहा है।
- मनीष तिवारी, अध्यक्ष, नगर पंचायत, पाली