वर्ष 2018 तक जनपद ललितपुर खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिले में करीब एक लाख शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। वहीं, गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आजादी के सात दशक के बाद भी खुले में शौच की कुप्रथा का उन्मूलन नहीं किया जा सका है। ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा खराब स्थिति है। गांवों में अधिकतर परिवार खुले में शौच करने जाते हैं। बरसात के सीजन में संक्रामक बीमारियों के फैलने का अंदेशा हमेशा बना रहता है। इसे ध्यान में रखकर स्वच्छ भारत मिशन चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत शौचालयों का निर्माण करने के साथ ग्राम पंचायतों को खुले में शौच मुक्त करने की योजना संचालित की जा रही है।
वर्तमान में वित्तीय वर्ष में जिले की 26 ग्राम पंचायतों को खुले में शौच मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। अब शासन ने इसका दायरा बढ़ाते हुए प्रदेश के तीस जिलों को इसमें शामिल किया है। जिसमें ललितपुर जिला भी है। इस लक्ष्य को तय करने के लिए दिसंबर माह तक का समय दिया गया है। जिला प्रशासन ने इस पर काम करना प्रारंभ कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक बनाने में आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सफाई कर्मी, नेहरू युवा केंद्र के स्वयंसेवक व स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद ली जा रही है। प्रत्येक ब्लाक में पांच-पांच टीमें गठित योजना है, जो गांवों में जागरूकता फैलाने का काम करेंगे। इसके अलावा शौचालय निर्माण के लिए राज मिस्त्रियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
कहीं धन की कमी नहीं आए आड़े
मौजूदा वित्तीय वर्ष में जिले को 39196 शौचालय निर्माण का लक्ष्य दिया गया है। इसके मुकाबले शासन की ओर से 7794 शौचालय के लिए धनराशि अवमुक्त हुई। विभाग ने अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष 6065 शौचालयों का निर्माण करा पाया है। जबकि अब समूचे जिले को खुले में शौच मुक्त करने के लिए करीब एक लाख शौचालय का लक्ष्य रखा है।
गांवों में काम करने वाले सफाई कर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, नेहरू युवा केंद्र स्वयंसेवक और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को पांच दिन का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। वहीं, समुदाय आधारित संपूर्ण स्वच्छता अभियान चलाकर जिले को खुले में शौच से मुक्त किया जाएगा।
बृजेंद्र कुमार
डीपीआरओ ललितपुर।