घंटाघर से गोविंद सागर बांध तिराहा तक तीन किमी की सड़क से गुजरना मुश्किल, उड़ रही धूल, उछल रही गिट्टी
वाहनों और राहगीरों के साथ-साथ दुकानदार भी परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के अभियान के नाम पर शहर में सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। हालत ये है कि घंटाघर से गोविंद सागर बांध तिराहा तक की करीब तीन किलोमीटर की डामर की सड़क के गड्ढों को डस्ट युक्त गिट्टी से भरा जा रहा है। ऐसे में इससे उड़ने वाली धूल से वाहन चालक, राहगीर और दुकानदारों को भारी परेशानी हो रही है। वहीं वाहन निकलते समय गिट्टी उछलने से लोग चोटिल हो रहे हैं।
शहर में पुराना सागर रोड पर घंटाघर से लेकर गोविंद सागर बांध तिराहा तक करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क शहर की प्रमुख सड़क है। इस सड़क पर शहर के मुख्य बाजार सावरकर चौक, आजाद चौक और मवेशी बाजार हैं। सड़क के दोनों ओर दुकानें भी हैं। इस सड़क मार्ग से प्रतिदिन करीब दस हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। पैदल राहगीर भी इस सड़क का प्रयोग करते हैं।
वहीं, यह प्रमुख मार्ग कुछ वर्षों से खस्ताहाल पड़ा है। इसमें जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। इस कारण सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों सहित राहगीर भारी परेशानी से जूझ रहे हैं। खस्ताहाल सड़क को ठीक करने या नई सड़क बनाने की मांग काफी समय से लोगों के द्वारा की जा रही है। लेकिन विधायक, मंत्री व जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते सड़क पर गड्ढे ही दिखाई दे रहे हैं।
इन्हें भरने के लिए सिर्फ रस्म अदायगी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में दीपावली तक सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए थे, ऐसे में लोक निर्माण विभाग ने इस खस्ताहाल सड़क के गड्ढों को भरने का काम शुरू किया। लेकिन, डामर की इस सड़क के गड्ढों को डस्ट युक्त गिट्टी से भरा जा रहा है। इससे वाहन निकलते समय गिट्टी के लगने से लोगों के चोटिल होने का खतरा बना हुआ है। वहीं, धूल उड़ने से दुकानदार परेशान हो रहे।
उधर, राहगीरों को गर्दन की नस चढ़ने, खिंचाव महसूस होने और दर्द की शिकायत हो रही। कई मरीज प्रतिदिन जिला अस्पताल इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि वर्तमान में रीढ़ की हड्डी से संबंधित मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
घंटाघर से गोविंद सागर बांध तिराहा मार्ग तक पैचवर्क कराया जा रहा है। मौसम अनुकूल न होने के कारण गड्ढों के डामरीकरण का काम नहीं हो पा रहा है। जल्द ही सड़क का एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जाएगा। -बीपी सिंह, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग