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अब एकल नहीं रहेंगे स्कूल

Mon, 12 Sep 2016 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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school, lalitpur news - फोटो : demo
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ललितपुर। जिले के एक सैकड़ा से ज्यादा एकल विद्यालयों में अध्यापकों की तैनाती का रास्ता साफ हो गया है। विभाग ने ऐसे विद्यालयों में शिक्षकों को भेजने के लिए पदोन्नति में रोस्टर लागू करने की योजना बनाई है, जिससे दूरदराज के कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर होने की संभावना है।
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बेसिक शिक्षा विभाग में नियम कायदे तो बहुत हैं लेकिन, उन पर कड़ाई से पालन नहीं किया जाता है। जिस कारण परिषदीय विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पा रही है। जनपद में शिक्षा मित्रों का समायोजन, पंद्रह हजार शिक्षक भर्ती, सोलह हजार शिक्षक भर्ती होने के बाद भी दूरदराज के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो सकी है। वर्तमान में एक सैकड़ा से अधिक विद्यालय एक शिक्षक के सहारे संचालित हो रहे हैं। इनमें करीब 4 पूर्व माध्यमिक विद्यालय ऐसे हैँ, जिनमें एक भी अध्यापक नहीं है तो करीब 37 पूर्व माध्यमिक विद्यालय में एक अध्यापक है। 

कमोवेश यही स्थिति प्राइमरी स्कूलों की है। पहले से आधा सैकड़ा से अधिक प्राइमरी स्कूल एकल व्यवस्था थे। अंतर्जनपदीय स्थानांतरण में और भी कई स्कूलों में शिक्षक कम पड़ गए हैं। ब्लाक मड़ावरा के अधिकांश विद्यालयों में एक ही अध्यापक सभी कक्षाओं की जिम्मेदारी लिए हुए हैं। इस कमी को पाटने के लिए अब शिक्षकों की पदोन्नति का सहारा लिया जा रहा है। इस समय 177 सहायक अध्यापकों के प्रमोशन की प्रक्रिया चल रही है। इनमें 64 महिला अध्यापिकाएं व 113 पुरुष अध्यापक हैं। वरिष्ठता के दायरे में आ रहे शिक्षकों को प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक या फिर पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक बनाया जाएगा।
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गौरतलब है कि पदोन्नति के लिए पांच वर्ष का शैक्षिक अनुभव होना आवश्यक है। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने पदों की रिक्तिता को ध्यान में रखकर दो वर्ष की शिथिलता प्रदान कर दी है, जिससे तीन वर्ष का शैक्षिक अनुभव रखने वाले अध्यापक भी पदोन्नति के दायरे में आ गए हैं। इसके अलावा पूर्व में पदोन्नति छोड़ चुके शिक्षकों को एक अवसर प्रदान करते हुए इस प्रक्रिया में शामिल कर लिया है। महिला एवं दिव्यांग शिक्षकों को विकल्प के आधार पर विद्यालय आवंटित कर दिए गए हैं। शेष पुरुष अध्यापकों को रोस्टर से विद्यालय आवंटित किए जाएंगे। रोस्टर का क्या स्वरूप रहेगा, इसे स्पष्ट नहीं किया गया है? यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

सूची में हुआ खेल
खाली विद्यालयों की सूची में विभागीय कर्मियों ने जमकर खेल किया। नगर के करीब व पहुंचने में सुगम गांवों में स्थित विद्यालयों के नाम चस्पा की गई सूची मेें शामिल नहीं किए गए, जिस कारण से महिला व दिव्यांग शिक्षकों को चस्पा सूची में से ही विकल्प भरने पड़े। जिन विद्यालयों के नाम सूची में नहीं थे, वहां पर पसंदीदा शिक्षकों को तैनाती देने की तैैयारी चल रही है। 
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शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जो भी शासनादेश है, उसके आधार पर विद्यालयों का आवंटन किया जाएगा।
संतोष कुमार राय
बीएसए ललितपुर।
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