ललितपुर। केंद्र और प्रदेश सरकार की आपसी खींचतान में मनरेगा योजना के मजदूर पिस रहे हैं। बाइस जुलाई से योजना में न तो सामग्री और न ही मजदूरी का भुगतान हो रहा है। जिस वजह से जिले का 214.41 लाख रुपये का बकाया हो गया है। मनरेगा मजदूर भी मजदूरी से कतराने लगे हैं।
गांव में ही रोजगार मुहैया कराने को लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम केंद्र व राज्य सरकार के बीच समन्वय की कमी से गड़बड़ा रह है। इस समय मजदूरों को वृक्षारोपण, शौचालय निर्माण, वर्मी कम्पोस्ट जैसे कामों में रोजगार तो दिया जा रहा है, लेकिन उन्हें मजदूरी के नाम पर फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हो रही है। भुगतान की जगह केवल आश्वासन ही हाथ लग रहा है, जिससे मजदूरों को घर का चूल्हा जलना मुश्किल हो रहा है। कई मजदूरों ने तो मनरेगा का काम करने से मना कर दिया है। तमाम मजदूर पुराने बस स्टैंड पर मजदूरी की तलाश में खड़े होने लगे हैँ।
पिछले दिनों यूपीए फ्लैग योजना के प्रभारी संजय दीक्षित ने जिले में कई गांवों में चौपाल लगाई। इस दौरान उन्होंने मजदूरों को न केवल भुगतान बल्कि काम दिलाने का भरोसा दिया तो परेशान मजदूरों के चेहरों पर चमक लौट आई। श्री दीक्षित ने पत्रकार वार्ता कर दस सितंबर तक मजदूरों का भुगतान नहीं होने की स्थिति में डीएम का घेराव करने की घोषणा की। लेकिन, यहां से रवाना होने के बाद उन्होंने ललितपुर को पलट कर नहीं देखा। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो इस समय जिले के मजदूरों का 90.32 लाख रुपये, कारीगरों का 7.59 लाख रुपये व सामग्री का 111.27 लाख रुपये का बकाया चल रहा है। इस तरह जिले का कुल मिलाकर 214.41 रुपये का भुगतान अवशेष है। भुगतान के अभाव में मनरेगा मजदूरों की दिनों दिन हालत बिगड़ती जा रही है।
इधर, उपायुक्त श्रम रोजगार नरेंद्र देव द्विवेदी का कहना है कि करीब बाइस जुलाई से मजदूरों को उनकी मजदूरी नहीं मिल सकी है। लखनऊ स्तर से भुगतान की कोशिशें हो रही हैं। उधर, यूपीए फ्लैग योजना के प्रभारी संजय दीक्षित ने दूरभाष पर बताया कि इन दिनों कांग्रेस की यात्राओं की व्यवस्था बनाने में व्यस्त हैं। शीघ्र ही ललितपुर आकर डीएम का घेराव करेंगे। उन्होंने मनरेेेगा मजदूरों को न्याय दिलाने का भी भरोसा दिया।
डीएफओ कार्यालय में पहुंच रहे मजदूर
मनरेगा मजदूरों ने वृक्षारोपण में मजदूरी की है। मजदूर आए दिन डीएफओ कार्यालय में मजदूरी के भुगतान के लिए खड़े हो जाते हैं, जिसको लेकर विभागीय अफसर भी परेशान हैं।