संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में अब रक्त के अलग-अलग तत्व नहीं मिल पाएंगे। कारण, केंद्र सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने के कारण यहां स्थित ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की मशीनों को बंद कर दिया गया है। इससे डेंगू, लीवर बर्न, एनीमिया, थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के मरीजों के सामने संकट खड़ा हो गया है। अब उन्हें उपचार के लिए झांसी या अन्य महानगरों का रुख करना होगा।
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट न होने से जिला अस्पताल में ब्लड के अलग-अलग तत्व चढ़ाने की सुविधा नहीं थी, ऐसे में मरीजों को मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर करना पड़ता था। कई मरीज मध्यप्रदेश के सागर व भोपाल आदि चले जाते थे, जबकि निर्धन तबके के मरीजों को काफी दिक्कत होती थी और वे उपचार तक नहीं करा पाते थे। बीते वर्ष जिला अस्पताल को ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की सौगात मिली। विभाग ने किसी तरह इसे जनवरी में चालू कर दिया था। करीब एक हफ्ते में 50 यूनिट ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और आरबीसी अलग कर मरीजों को दिए जाने की सुविधा शुरू की गई थी। लेकिन, यूनिट के संचालन में केंद्र सरकार की एनओसी बाधा बन गई। केंद्र से अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने से अब यूनिट को बंद कर दिया गया है। अब डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, लीवर व बर्न के मरीजों को प्लाज्मा, एनीमिया और थैलीसीमिया के मरीजों को आरबीसी, हीमोफीलिया के मरीजों को क्रायोप्रेसीपिटेट मिलने का संकट खड़ा हो गया है।
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यह है ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं, जिसमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट चारों तत्वों को अलग-अलग करती है। इससे मरीजों को जरूरत वाला तत्व ही चढ़ाया जाता है। ऐसे में एक यूनिट रक्त से चार अलग-अलग मरीजों की जरूरतें पूरी हो जाती हैं।
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ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट संचालित करने के लिए राज्य से स्वीकृति मिल गई है, लेकिन केंद्र सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिला है। इससे यूनिट को बंद कर दिया गया है। एनओसी मिलने पर दोबारा चालू कराया जाएगा। - डॉ. एमएस राजपूत, ब्लड बैंक प्रभारी, जिला अस्पताल