ललितपुर। जाखलौन के कपासी गांव में दलित को मंदिर के भीतर जाने से रोकने की घटना को गांव वाले गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि उसे जाति के आधार पर नहीं, शराब पीकर मंदिर में जाने से रोका गया था। दूसरी तरफ, पीड़ित रमेश कुमार का कहना है कि वह पिछले दस साल से इस मंदिर में जा रहा पर किसी ने कभी नहीं रोका। गांव में जातिगत विवाद नहीं है। उसका कहना है कि बेवजह लोगों ने उसे पीट दिया।
मालूम हो कि मंगलवार को कपासी गांव निवासी रमेश कुमार ने एसपी को प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि तीन जुलाई की शाम साढ़े सात बजे वह मंदिर में जा रहा था। इसी दौरान गांव के ही कुछ प्रभावशाली लोगों ने उसे मंदिर जाने से रोक दिया और जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानित किया। जब उसने मंदिर के अंदर जाने का प्रयास किया तो उन लोगों ने मंदिर से घसीटते हुए उसके साथ मारपीट की। पांच हजार रुपये भी छीन लिए। एसपी ने जांच के आदेश दिए। बुधवार को धौर्रा चौकी प्रभारी वृषभान सिंह ने गांव में जाकर लोगों से बात की और पीड़ित समेत आरोपियों के बयान लिए। इस दौरान गांव वालों ने बताया कि यह मंदिर गांव के सभी वर्गों की आस्था का केंद्र है। सभी जाति वर्गों के लोग आते-जाते हैं। पुरातन काल से चली आ रही परंपराओं को सभी वर्ग पालन करते हैं। अभी तक इस संबंध में कोई विवाद नहीं हुआ है। रमेश भी मंदिर के सभी धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेता है। वह रोज शाम को मंदिर भी जाता है। कभी कोई रोकटोक नहीं हुई और न ही किसी प्रकार का विवाद हुआ है। मंगलवार को रमेश शराब के नशे में था और मंदिर में जा रहा था। इस कारण उसे रोका गया था। हालांकि, गांव वालों ने यह भी कहा कि रमेश कभी-कभार ही शराब पीता है और कभी किसी से विवाद भी नहीं हुआ।