ललितपुर। जिले में किसानों को खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने में पसीने आ रहे हैं। यहां पर किसानों को ऑनलाइन टोकन जारी कराने के लिए कर्मचारियों व अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके बाद भी गेहूं बेचने के लिए टोकन जारी नहीं हो पा रहे हैं। सोशल डिस्टेंस पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन किसान एक स्थान से दूसरे स्थान पर भाग दौड़ कर रहे हैं, इसके बाद भी टोकन जारी नहीं हो रहे हैं। ऐसे में किसान परेशान होकर माटी मोल गेहूं बेचना बेहतर समझ रहा है।
शासन द्वारा किसानों को गेहूं बिक्री के लिए सुलभ व्यवस्था की गई है। इसके तहत गेहूं खरीद केंद्र खोले गए हैं। जहां पर किसानों को गेहूं 1925 प्रति क्विंटल की दर से बेचने की सुविधा दी गई है। लेकिन, अफसरों की उदासीनता के कारण गेहूं खरीद केंद्र पर गेहूं बेच पाना किसान के लिए लोहे के चना चबाने जैसा साबित हो रहा है। खरीद केंद्र पर किसानों को गेहूं बिक्री के लिए पहले वेबसाइट पर आवेदन ऑनलाइन करना होगा। आवेदन की कॉपी के साथ 61 ख के आवेदन पर लेखपाल से रिपोर्ट लगवानी होगा। इसके बाद राजस्व निरीक्षक (कानूनगो ) से रिपोर्ट लगवाई जाएगी। दोनों अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद तहसीलदार के हस्ताक्षर कराना है। हस्ताक्षर के बाद कार्यालय में आवेदन को जमाकर फीडिंग होने के बाद किसानों को आवेदन लेकर गेहूं खरीद केंद्र पर जमा करना होगा, इसके बाद किसानों को टोकन जारी हो रहे हैं और खरीद केंद्र पर गेहूं तौलने की तिथि मिल पा रही है। इससे किसान की मुसीबत हल होने की जगह और बढ़ गई है।
यह प्रक्रिया किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है। किसानों को पहले लेखपालों को ढूंढना। इसके बाद दूसरे अधिकारियों के मिलने में कई दिनों तक चक्कर काट रहे हैं। कार्यालयों में अधिक भीड़ होने से सोशल डिस्टेंसिंग का खतरा बना है। इस प्रक्रिया से परेशान होकर कई किसान तो आवेदनों को बीच में छोड़ कर भाग रहे हैं। जबकि, शासन किसानों को उपज बेचना सरल करने की बात कह रहा है। लेकिन, जिले में अधिकारियों की उदासीनता के कारण शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है। इससे किसानों को क्रय केंद्र पर गेहूं बेचना मुश्किल साबित हो रहा है।
पिछले वर्ष थी यह प्रक्रिया
बीते वर्ष किसानों को रबी की फसल में गेहूं को खरीद केंद्र पर बेचना बहुत ही आसान था। इसके लिए किसानों को ऑनलाइन आवेेदन करना होता था, जिसके बाद ऑनलाइन आवेदन से ही क्रय केंद्र पर जाकर नंबर लग जाता था और किसानों को गेहूं बेचने में सुविधा होती थी। लेकिन, इस बार लॉकडाउन और प्रकिया का जटिल होना किसानों को अधिक परेशान कर रहा है।
क्या फायदा ऑनलाइन का ?
ऑनलाइन की सुविधा का मकसद घर बैठे सब काम हो जाना है। लेकिन, जिले में ऑनलाइन का मकसद पसीना बहाना साबित हो रहा है। जब किसान अपनी खसरा- खतौनी बेवसाइट पर अपलोड करता है तो सही होने पर स्वत: ही अपलोड हो जाती है। इससे किसान को बेवजह अफसरों के चक्कर लगाने से छुटकारा मिल जाता है, लेकिन यहां पर किसान को अधिकारियों से रिपोर्ट लगवानी पड़ रही है। ऐसे में किसान को ऑनलाइन का मतलब समझ में नहीं आ रहा है।
किसान गेहूं को बेचने के लिए जनसेवा केंद्र पर ऑनलाइन आवेदन करें। इसके बाद एसडीएम द्वारा आगे की कार्रवाई कराई जाएगी।
- अनिल कुमार मिश्र[ अपर जिलाधिकारी
किसानों को ऑनलाइन आवेदन के नाम पर परेशान किया जा रहा है। किसान बेवजह इधर- उधर चक्कर लगा रहे हैं और उसे शासन की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
- नवनीत शर्मा, भारतीय किसान संघ