कैप्सन - माताटीला बॉध बार्डर पर निरीक्षण करते डीएम एवं एसपी
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तालबेहट। कोरोना वैश्विक महामारी के संक्रमण की चेन को समाप्त करने के लिए प्रशासन जहां पूरी ताकत के साथ कार्य कर रहा है, वहीं क्षेत्र में बाहरी स्थानों से मजदूरों और कामगारों का आना जारी है। बिना स्वास्थ्य परीक्षण के गांव में आने वालों की सूचना से ग्रामीणों में भय का माहौल है।
लॉकडाउन के दूसरे चरण को लागू हुए सात दिन हो गए हैं। जनपद में बिना सूचना के बाहरी व्यक्तियों के आने पर प्रतिबंध है। जनपद की सारी सीमाएं सील हैं। जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल और पुलिस अधीक्षक कैप्टन मिर्जा बेग ने सोमवार की शाम को मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर माताटीला बांध का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को दिशा- निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में बाहरी व्यक्ति को बिना जानकारी के प्रवेश न दिया जाए। बाहर से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का प्रत्येक दशा में स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। इस मौके पर सीओ देवेंद्र कुमार सिंह तथा प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार वर्मा मौजूद रहे।
बाहर से आए लोगों की दो दिन बाद भी नहीं हो पाई जांच
तालबेहट। सख्ती के बावजूद बाहरी जनपदों से रात्रि के समय विभिन्न गांवों में मजदूरों का आना बदस्तूर जारी है, जिन लोगों की जानकारी हो जाती है, उनका परीक्षण करा दिया जाता है और जिन लोगों की जानकारी नहीं हो पाती है वह बताने में भी संकोच कर रहे हैं। रविवार को ग्राम रजावन में महाराष्ट्र के पुणे और चित्रकूट से कुछ लोग आए। इसकी जानकारी ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारियों को दी, परंतु इनकी जांच करने दो दिन बाद कोई टीम नहीं आई। सोमवार को तहसीलदार श्रीकृष्ण ने लेखपाल को गांव भेजा था। इस पर लेेखपाल ने जांच कराने के लिए सीएचसी जाने की बात कही थी, परंतु मंगलवार को न तो वह लोग स्वयं जांच कराने सीएचसी तालबेहट पहुंचे और न ही स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम गांव में जांच करने और उन्हें क्वांरटीन करने पहुंची। इस संबंध में तहसीलदार श्रीकृष्ण का कहना है कि सोमवार को लेखपाल का बता दिया गया था। वहीं, लेखपाल दीनदयाल मिश्रा का कहना है कि तीन लोग चित्रकूट और एक युवक पुणे से आया था, जिनसे जांच के लिए कहा गया, लेकिन वह जांच कराने नहीं गए।