- सिद्ध चक्र महामंडल विधान के आठवें दिन समर्पित किए गए 1024 अर्घ्य
संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पवागिरि में बुंदेली मुनि सुव्रत सागर के मंगल सानिध्य से आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान में विशुद्धि पूर्वक सिद्धों की आराधना की जा रही है।
सोमवार को सुबह पं. महेंद्र कुमार शास्त्री के निर्देशन में अभिषेक शांतिधारा पूजन विधान के उपरांत विधान में सिद्धों की आराधना कर एवं भक्तिभाव से 1024 अर्घ्य समर्पित किए गए। प्रतिष्ठाचार्य अशोक के नेतृत्व में चमत्कारी बाबा मूलनायक भगवान पारसनाथ स्वामी का कलशाभिषेक, शांतिधारा का आयोजन किया एवं मंगल आरती उतारी। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि सुव्रत सागर ने कहा कि सभी कहते हैं कि अकेले आना है अकेले जाना है, लेकिन लौकिक व्यवहार में दो के बिना कोई आता नहीं और चार के बिना कोई जाता नहीं। माता-पिता के बिना कोई इस दुनिया में आता नहीं और मरने के बाद चार कंधों के बिना कोई जाता नहीं। इस नाते हमें अपने माता-पिता के उपकार को कभी नहीं भूलना चाहिए एवं जीवन में परोपकार की भावना रखते हुए सभी का सहयोग कर एक-दूसरे से मिलकर रहना चाहिए। जब हम दूसरों को भला सोचते हैं तब भगवान मेरा भला स्वयं कर देते हैं। इस मौके पर क्षेत्र समिति के पदाधिकारी एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। जयकुमार जैन कंधारी ने बताया 30 दिसंबर मंगलवार को सिद्ध चक्र महामंडल विधान के समापन पर पूर्णाहुति, विश्व शांति महायज्ञ, हवन एवं विमानोत्सव का कार्यक्रम होगा।