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घर लौटै प्रवासी मजदूरों को नहीं मिल रहा रोजगार, पड़ने लगे खाने के लाने

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ललितपुर। बिरधा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम चढ़रऊ में घर लौटे प्रवासी मजदूरों को एकांतवास के बाद रोजगार का संकट सताने लगा है। वे काम ढूंढ रहे हैं, ताकि परिवार के सदस्यों के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो सके। लेकिन, उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है।
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गृह जनपद पहुंचे प्रवासी मजदूरों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है। इतने लोगों को रोजगार मुहैया कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि, शासन गांव में रोजगार के लिए मनरेगा पर जोर दे रहा है, लेकिन धरातल पर इसका असर दिखाई देने में समय लगेगा। लॉकडाउन-1 के दौरान लौटे प्रवासी मजदूरों को अभी तक रोजगार से नहीं जोड़ा जा सका है। कई ऐसे मजदूर हैं, जिन्होंने 14 दिनों का होम क्वारंटीन पूरा कर लिया है, लेकिन बेरोजगार बैठे हैं।
देशव्यापी लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर पड़ा है। उद्योग धंधे बंद होने से कई श्रमिक बेरोजगार हुए हैं। अन्य राज्यों में फंसे मजदूर अपने- अपने राज्यों को वापस लौट रहे हैं। ललितपुर जिले में भी प्रतिदिन 1500 मजदूरों को बसों से लाया जा रहा है। उन्हें क्वारंटीन किया जा रहा है। लेकिन, घर पर लौटने के बाद श्रमिकों को उनके गांव में रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
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अब कैसे चलेगा घर
कोरोना वायरस के कारण देश में 25 मार्च से लॉकडाउन है। प्रवासी मजदूर परेशान हैं। ये मजदूर कई साल पहले काम की तलाश में गांव और घर छोड़कर शहर चले गए थे। मजदूरों का कहना है कि लॉकडाउन के बाद कई सौ किलोमीटर पैदल चलकर तो किसी साधन के माध्यम से घर वापस लौटे हैं। लेकिन, उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। ऐसे में उन्हें चिंता सता रही है कि अब घर कैसे चलेगा।
हम हरियाणा में काम करने गए थे और फिर लॉकडाउन हो जाने के बाद वहीं फंसे रह गए। उसके बाद जब घर लौटे तो रास्ते में सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलना पड़ा था। यहां कोई रोजगार नहीं मिल रहा।
- मैंदा
रोजगार नहीं मिलने से परिवार को खाने का संकट होने लगा है। कब तक हम लोग भूखे रहेंगे। प्रशासन को हमें रोजगार देना चाहिए। गांव में मनरेगा के अंतर्गत हमें कोई काम नहीं मिल रहा ।
- करन बुनकर
जिले में काम नहीं मिलने से अन्य राज्य में काम करने गए थे, लेकिन लॉकडाउन के कारण वहां भी फंसे रहे और जितना कमाया सब खत्म हो गया। कुछ दिन से घर पर बैठे- बैठे पूरा पैसा खत्म हो गया।
- लखन
रोजगार नहीं मिलने से खाने को राशन तक का संकट आ गया है। रोजगार नहीं मिलेगा, तो संकट और भी बढ़ सकता है। ग्राम पंचायत से मनरेगा का भी काम मिल जाता तो कम से कम घर तो चल जाता।
- रामदेवी कुशवाहा
घर छोड़कर कोई परदेश नहीं जाना चाहता, मजबूरी सब कराती है। सोनीपत से झांसी तक सड़कों पर लाखों मजदूर की भीड़ चल रही थी। जॉब कार्ड होने के बाद भी ग्राम पंचायत में काम नहीं मिल रहा है।
- प्रेम कुशवाहा
परदेश नहीं जाना चाहते थे, लेकिन मजबूरी में घर छोड़कर जाना पड़ा। अगर गांव में काम मिला होता तो हमें परदेश नहीं जाना पड़ता। शहर से गांव लौटने के बाद पहले तो गांव के स्कूल में क्वारंटीन रहे, फिर उसके बाद अब घर पर हैं।
- वीरन
गांव में जो भी प्रवासी मजदूर आ रहे हैं। उनको मनरेगा के अंतर्गत काम दिये जाने की कोशिश कर रहे हैं। जिनके जॉब कार्ड हैं, उन्हें काम दिया जाएगा। अभी जिनके जॉब कार्ड नहीं है, उनके भी बनवाए जाएंगे और काम दिया जाएगा।
- नारायण, ग्राम प्रधान चढ़रऊ
जनपद में आने वाले प्रवासी मजदूरों की संख्या रोज बढ़ रही है। अभी प्रतिदिन लगभग 1500 प्रवासी मजदूर आ रहे हैं। आने वाले मजदूरों को क्वारंटीन किया जा रहा है। मजदूरों का एकांतवास पूरा हो जाने के बाद उन्हें मनरेगा के अंतर्गत रोजगार देने के लिए ग्राम प्रधानों को निर्देश दिए गए हैं।
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- योगेश कुमार शुक्ल, जिलाधिकारी
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