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खाना मांगने पर सभी को भेज दिया घर, किया होम क्वारंटीन

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कैप्सन - 6= विद्यालय के शौचालय में पड़ा ताला - फोटो : TALDEHATE
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तालबेहट। शासन और प्रशासन संकट की घड़ी में गरीबों और मजलूमों के जख्मों को भरने के लिए कितने ही प्रयास कर लें, परंतु कुछ लोगों की करतूतों से उनकी योजनाएं फलीभूत नहीं हो पाती हैं। ग्राम झांवर में इंदौर से आए 60 से अधिक लोगों को क्वारंटीन सेंटर में ग्राम प्रधान द्वारा खाने के नाम पर रस्म अदायगी की गई और उन्हें सिर्फ चावल दिया गया। जब मजदूरों ने विरोध किया तो स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसके बाद सभी को होम क्वारंटीन कर दिया गया है। इससे आसपास के लोगों में चिंता का भय व्याप्त है।
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देश के विभिन्न प्रांतों से आने वाले मजदूरों के खानपान की व्यवस्था के लिए मनरेगा सहित कई प्रकार की योजनाएं चल रही हैं। बाहर से आए मजदूरों के लिए गांव-गांव में क्वारंटीन सेंटर खोले गए हैं। सभी का स्वास्थ्य परीक्षण कराने और दो सप्ताहतक क्वारंटीन करने के निर्देश हैं। लेकिन, इसके बावजूद कुछ जिम्मेदार अपने दायित्वों के निर्वहन में हीलाहवाली कर रहें हैं। विकासखंड के ग्राम झांवर में मध्य प्रदेश के इंदौर से कुछ लोग अपने गांव आए, जिन्हें पूर्व माध्यमिक विद्यालय में रोक दिया गया। इसके बाद जब उनके खाने की व्यवस्था की गई, लेकिन जिम्मेदारों ने हाथ खड़े कर दिए। मजदूर लालाराम और नंदू ने बताया कि शनिवार को मात्र दो किलोग्राम चावल खाने को दिए गए थे। रविवार को मजदूरों को जब दोपहर तक खाना नहीं मिला तो उन्होंने आपत्ति उठाई। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसके बाद सभी को होम क्वारंटीन कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों में चिंता उत्पन्न हो गई है।
मैंने मजदूरों को चावल दिया था। जिन्हें वहां रुकी महिलाएं ही बनाएंगी। रसोइयों को खाना बनाने के लिए मना कर दिया गया है। पूरी खाद्य सामग्री रखी है। गांव की राजनीति के कारण यह लोग विरोध कर रहे हैं। अभी तक लगभग एक सौ पचास लोग वहां रुक चुके हैं।
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- संजीव सोनी, ग्राम प्रधान झांवर
मुझे इस संबंध में किसी ने कोई जानकारी नहीं दी। अब जानकारी मिली है। मैं पता करता हूं।
- श्रीकृष्ण, तहसीलदार तालबेहट
ग्राम म्यांव में मजदूरों को लाना पड़ रहा घर से खाना
तालबेहट। सरकार बाहर से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को चौदह दिन क्वारंटीन सेंटरों में रोक कर रखने और उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराने की बात कहती आ रही है। लेकिन, गांव- गांव में बने क्वारंटीन सेंटरों में रोके गए मजदूरों की बेबसी सुनने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। ग्राम म्यांव में रुके मजदूरों को घर से खाना लाना पड़ रहा है।
विकासखंड के ग्राम म्यांव में महाराष्ट्र के पुणे से आए आए विकास पुत्र मेवालाल, रविंद्र, पुष्पेंद्र, सोनू आदि ने बताया कि वह लोग जब से आए हैं, तभी से उन्हें अपने घरों से दोनों वक्त का खाना लाना पड़ रहा है। क्वारंटीन सेंटर में खाने का प्रबंध नहीं है। विद्यालय के कमरे के ताले बंद है। इस भीषण गर्मी में वह दालान में समय गुजार रहे हैं। इसके अलावा लाइट की सुविधा नहीं दी जा रही है। उन्होंने इस संबंध में अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मांग की है कि उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उन्हें घर भेज दिया जाए, जिससे वह गर्मी एवं मच्छरों के प्रकोप से बीमार होने से बच सकें।
जहां-जहां हमारे क्वारंटीन सैंटर हैं, वहां सभी सुविधाओं का प्रबंध है। ग्राम प्रधान किस आधार पर अपने यहां मजदूरों को रोक रहे हैं। यह समझ में नहीं आ रहा है। फिर भी मैं जानकारी कराता हूं, जो हो सकता है करवाता हूं।
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- मोहम्मद कमर, उपजिलाधिकारी तालबेहट।

कैप्सन - 4,5- पूर्व माध्यमिक विद्यालय झांवर में रुके बाहर से आए मजदूर- फोटो : TALDEHATE

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