डोंगराखुर्द। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जिले के अमझरा घाटी बार्डर पर प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला थम गया है। बृहस्पतिवार को गोशाला में सन्नाटा पसरा रहा। बुधवार की रात को 11 बसों के माध्यम से 586 मजदूरों को भेजा गया।
गोशाला में पिछले कई दिनों से प्रवासी मजदूरों की बड़ी संख्या में भीड़ एकत्रित हो रही थी। बृहस्पतिवार को प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला थम गया। गोशाला के अंदर पूरे परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि अब लगभग सभी प्रवासी मजदूर अपने-अपने गंतव्य तक पहुंच गए हैं। गोशाला में महानगरों से आए हजारों मजदूरों को ठहरने का सहारा मिला था और भोजन व पानी की व्यवस्था थी, लेकिन पिछले तीन दिन से अब गोशाला खाली हो गई है। गायों की रहने वाली गोशाल प्रवासी मजदूरों से सूनी हो गई है, अब चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है।
सभी प्रवासी मजदूर अधिकतर अपने गांव पहुंच गए हैं। बाहर से आए मजदूरों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि ऐसा ही समय आएगा और उन्हें गोवंशों के बीच बैठकर खाना-पीना करना पड़ेगा। ऐसा समय भी आया है कि मजदूर गोशाला में रुके और विश्राम किया। अपनी थकान को दूर किया। इस गौशाला में लोगों की पीड़ा भी देखी कि लोग छांव के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हुए लोग घर जाने के लिए उतावले दिखे। गोशाला में हजारों की संख्या में लोग आ रहे थे, लेकिन तीन दिन से दोपहर के बाद सन्नाटा पसरा रहता है। जो प्रवासी मजदूर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात अन्य प्रदेशों से अपने घरों को पैदल चल दिए थे, उन्हें रास्ते में बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ा था।
मजदूरों के आने की भीड़ कम हो गई है। रात में 11 बसें भेजी गईं थी जिनमें 586 मजदूर गए थे। दिन में दो बसें गईं और एक सैकङा मजदूर भेजे गए।
- फूल सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी पाली।
मजदूरों की आवाजाही कम हो गई है। ट्रेन चलने के कारण अब भूले- भटके लोग ही आ रहे हैं। इन्हें तत्काल बसों में सुरक्षित बैठाकर पहुंचाया जा रहा है।
- अभिषेक कुमार सिंह, तहसीलदार पाली