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सीतामढ़ी जलकुंड की नहीं हो रही देखरेख

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सीतामढ़ी कुंड में नहाते बच्चे - फोटो : LALITPUR
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पाली। श्री नीलकंठेश्वर मंदिर से सटे सीतामढ़ी पर कुंड बना है, लेकिन कुंड की देखरेख नहीं होने के कारण वह जर्जर होता जा रहा है। कुंड में सुबह-शाम कस्बा के लोग नहाने आते हैं। लेकिन, इसके कुंड की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अनदेखी के कारण यह कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुका है। कुंड के पास बना एक ओर कुंड है, जिसका कई वर्षों पूर्व तत्कालीन एमएलसी श्याम सुंदर सिंह ने अपनी निधि से सौंदर्यकरण कराया था। नीलकंठ कुंड के नाम से प्रसिद्ध इस छोटे से कुंड की उपयोगिता पाली के रहवासियों और आसपास के लोगों को भलीभांति पता है, लेकिन पुरातत्व विभाग व नगर पंचायत द्वारा इसकी सुध नहीं ली जा रही है। कुंड की सीढ़ियां पूर्व में क्षतिग्रस्त होने के कारण बरसात के दौरान कुंड में भरा पानी रिसकर नीचे जाता है। लगभग 10 फिट में फैले इस कुंड के दोनों और सीढ़िया थीं, लेकिन एक तरफ की सीढ़ियां बरसात में कई वर्ष पहले से ढह गई थीं। इस कुंड की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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सीतामणी कुंड की एक दीवार टूट गई है। दीवार का मलबा भी कुंड में गिरने से इसकी गहराई कम हो गई। अब कुंड में दर्शनार्थी व बच्चे नहाते हैं। पूर्व में कुंड से जल की सप्लाई से फूलों की बगिया महका करती थी।
- आजादपुरी, पुजारी नीलकंठ मंदिर
नीलकंठ मंदिर के पास एक बगिया थी, जिसके पुष्प भगवान को अर्पित किए जाते थे। लेकिन, देखरेख और रखरखाव के अभाव में बगिया वीरान हो गई है। कुंड के पानी से बगिया में विभिन्न प्रकार के फूलों की क्यारियां में पानी दिया जाता था।
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- चेतनदास महाराज, सीतामढ़ी आश्रम
नीलकंठ कुंड के पास बरसों पुरानी धर्मशाला बनी है, जो बदहाली के कारण दुघर्टनाओं को न्यौता दे रही है। वर्तमान में एसकी दीवारें टूटने के कगार पर हैं। ऐसी स्थिति में कुंड का जल लेने वाले श्रद्धालु डरते हैं।
- आलोक चौरसिया
इस कुंड में जो पानी आता है, वह पहाड़ों से रिसकर आता है। पहाड़ों पर कई जड़ी बूटियां हैं। इस पानी में बीमारियां ठीक करने की ताकत है। इस पानी से शरीर निरोगी रहता है।
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- संजीव चौरसिया
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