पाली। जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर विंध्याचल पर्वत श्रंखला पर स्थित श्री नीलकंठेश्वर मंदिर अद्वितीय है। सावन के महीने में यहां दूर- दूर से श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने के लिए आते हैं। अबकी बार कोरोना संक्रमण के कारण बहुत कम श्रद्धालु आ रहे हैं। श्रद्धालुओं ने ‘हर-हर बम-बम’ के जयकारे लगाए।
कस्बा पाली स्थित भूत भगवान श्री नीलकंठेश्वर मंदिर प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है। करीब 13 सौ साल पुराना चंदेल कालीन राजाओं द्वारा निर्मित मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। सीढ़ियां चढ़कर इस मंदिर तक पहुंचा जाता है। सीढ़ियों के दोनों ओर झरना भी बहता है। हालांकि, यह विहंगम दृश्य अच्छी बरसात में ही देखने को मिलता है। यहां के स्थानीय निवासी बताते हैं कि मंदिर के नीचे जो झरना साल भर बहता है। उसका पानी कहां से आता है, इस बात की जानकारी किसी को नहीं है। लेकिन, जो भी इस पानी को लगातार सेवन करता है उसकी काया निरोगी बन जाती है।
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शिवजी की त्रिमुखी प्रतिमा
एक मुखी ज्योतिर्लिंगमंदिर में काले पत्थर से भगवान की त्रिमुखी अद्भुत प्रतिमा के दर्शन होते हैं। इस प्रतिमा को दसवीं शताब्दी में चंदेलकालीन राजाओं ने बनवाया था। इस से मंदिर में शिखर नहीं है। भगवान शिव की त्रिमुखी प्रतिमा के नीचे फर्श पर एक मुखी ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं। शिव भक्त इसे भगवान भोलेनाथ के अर्धनारीश्वर रूप मानते हैं। इस अद्भुत प्रतिमा के आठ हाथ दर्शाए गए हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ का अभिषेक व पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
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ऐसे पहुंचें मंदिर
बाहर से आने वाले श्रद्धालु ललितपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर पाली पहुंचने के लिए बस से जा सकते हैं। पाली बस स्टैंड पर उतरकर लगभग चार किलोमीटर दूर श्री नीलकंठेश्वर मंदिर बना है। लेकिन, कस्बा पाली में रात्रि विश्राम का कोई साधन नहीं है। इसीलिए सुबह जाकर शाम को जिला मुख्यालय लौट आएं।
फोटो सहित क्रमांक - 3-कैप्सन - भीतर कोट शिवालय में अभिषेक करता श्रद्धालु।
शिवालयों में किया भोले का अभिषेक
तालबेहट। सावन माह के दूसरे सोमवार को श्रद्धालुओं ने हजारिया महादेव मंदिर बाहर कोट और भीतर कोट पर जाकर भगवान शिव के दर्शन किए और अभिषेक किया। मंदिर के पुजारी ने श्रद्धालुओं को बारी- बारी से दर्शन करने की व्यवस्था की थी। कोरोना संक्रमण के बाद भी श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन किए, जिन्हें मंदिर के व्यवस्थापकों ने बारी-बारी से दर्शन कराने की व्यवस्था बनाई थी। उधर, श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए बाहर कोट मंदिर पर सुबह पुलिस की व्यवस्था रही।
श्री नीलकंठेश्वर मंदिर में भगवान की पूजा- अर्चना करते श्रद्धालु- फोटो : LALITPUR
श्री नीलकंठेश्वर मंदिर में विराजमान भगवान शिव की त्रिमुखी प्रतिमा- फोटो : LALITPUR