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आसपास नहीं है भगवान विष्णु का मंदिर

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मड़ावरा। गांव गोराकछया में दुर्लभ भगवान विष्णु की प्रतिमा का मिलना क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है। भगवान विष्णु की प्रतिमा के साथ हवनकुंड की वेदी मिलने से इस बात की आशंका लगाई जा रही है कि क्षेत्र में प्राचीन सभ्यता से जुड़ा कोई स्थान रहा होगा। अब पुरातत्व विभाग के ऊपर निर्भर करता है कि क्षेत्र में खुदाई कराता है या नहीं।
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गांव गोराकछया के आसपास हजारों हेक्टेयर जमीन बंजर पड़ी थी। जंगली क्षेत्र होने के कारण लोगों का कम आना-जाना था। गांव से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर मध्यप्रदेश की सीमा लगती है। करीब 10 वर्ष पहले यहां पर जमीनों के पट्टे दिए गए, तब से यहां पर खेती होने लगी है और चहल-पहल शुरू हुई। भगवान विष्णु की प्रतिमा गांव के रामचरण कुशवाहा के खेत में मिली है। प्रतिमा खेत में अधिक गहराई पर नहीं थी। जब खुदाई करके प्रतिमा निकाली गई तो पास में ही हवनकुंड वेदी भी मिली है। अब गांव वालों ने श्री राधाकृष्ण मंदिर में भगवान विष्णु की इस दुलर्भ प्रतिमा को स्थापित करने का निर्णय लिया है।
क्षेत्र में आसपास कहीं भगवान विष्णु का मंदिर तो नहीं है और न ही पिछले समय में यहां भगवान विष्णु के मंदिर के प्रमाण मिले हैं, लेकिन खेत की खुदाई में भगवान विष्णु की प्रतिमा और हवनकुंड मिलना इस बात के संकेत दे रहा है कि हो सकता है कि यहां आसपास भगवान विष्णु के उपासक रहे हैं और उन्होंने यहां मंदिर बनवाया हो, जो कालांतर में क्षतिग्रस्त हो गया होगा।
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ऐसे में अब पुरातत्व विभाग का दायित्व है कि वह प्रतिमा स्थल और आसपास के क्षेत्र की खुदाई कराए, क्योंकि जिले में ऐसे कई स्थान हैं। देवगढ़ में भगवान विष्णु का पांचवीं शताब्दी का दशावतार मंदिर है। राजकीय संग्रहालय में लगभग सवा सौ प्रतिमाएं संरक्षित हैं, जो नौवीं से ग्यारहवीं शताब्दी की हैं। एक ही पत्थर को तराश कर बनाई गई यह प्रतिमा भी बहुत पुरानी है। चांदपुर और दूधई में प्राचीन प्रतिमाएं हैं, पहाड में नृसिंह भगवान की प्रतिमा उकेरी गई है। ऐसे में संभावना है कि इस क्षेत्र में कोई सभ्यता रही होगी, वरना जंगल में भगवान की प्रतिमा कहां से आई।
पूर्व में खेत की जुताई करते समय किसान रामचरन के ट्रैक्टर के कल्टीवेटर के फल से प्रतिमा टकराई थी, लेकिन किसान ने ध्यान नहीं दिया और पत्थर समझकर अनदेखा कर दिया गया था।
आठ दस साल पहले ही जमीन पर खेती शुरू हुई है। पहले जमीन वीरान थी। आसपास भगवान विष्णु के किसी मंदिर के प्रमाण नहीं है।
- योगेंद्र सिंह, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि छपरौनी
भगवान विष्णु की प्रतिमा दुलर्भ है। जिलाधिकारी से बात करके इस प्रतिमा को संग्रहालय में रखवाया जाएगा। क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद ही अगला कदम उठाने का निर्णय लिया जाएगा।
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- एसके दुबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी
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