ललितपुर। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए गोविंद सागर बांध की तलहटी में तैयार हो रहे गड्ढे की खुदाई की प्रगति देखने के लिए सोमवार को नगर पालिका अध्यक्ष ने निरीक्षण किया। उन्होंने अधीनस्थों को समय से खुदाई करने, दशहरा मैदान का समतलीकरण करने और कर्बला स्थल की तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए।
उच्च न्यायालय ने पर्यावरण को सुरक्षित रखने, तालाबों, पोखरों और बांधों के पानी को जलप्रदूषण से रोकने के निर्देश दिए हैं। इसका अनुपालन करते हुए पहली बार नगर पालिका ने देवी प्रतिमाओं का ईको फ्रेंडली विसर्जन करने का निर्णय लिया है। नगर में स्थापित दो सैकड़ा से अधिक देवी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए गोविंद सागर बांध में 25,000 वर्ग फुट का गड्ढा बनाया जा रहा है। आयोजन की तिथि करीब आने पर खुदाई का कार्य तेज हो गया है।
तैयारियों को देखते हुए सोमवार को पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने अधीनस्थों के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने अवर अभियंता विपिन कुमार को समय से गड्ढा खुदवाने, इसमें पर्याप्त पानी भरने और गड्ढे में उतरने के लिए घाट बनवाने के निर्देश दिए। विसर्जन स्थल तक समुचित प्रकाश व्यवस्था बनाने के निर्देश मुख्य स्टोर लिपिक (विद्युत) चंद्रविनोद मिश्रा को दिए। साफ-सफाई व कचरे के निस्तारण के लिए स्वास्थ्य स्टोर लिपिक अभिषेक चौबे को निर्देश दिए।
मैदान समतल कर चूना का छिड़काव करें
नगर पालिकाध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने अपने अधीनस्थों के साथ गोविंद नगर स्थित रावण दहन स्थल दशहरा मैदान का निरीक्षण किया। मैदान में लगे कचरे के ढेर पर उन्होंने नाराजी व्यक्त की। उन्होंने उसे हटाने के निर्देश स्वास्थ्य नायक को दिए। साथ ही अवर अभियंता को मैदान में डस्ट डालकर समतली करण करने, निकासी मार्ग पर चूने का छिड़काव कराने और समुचित प्रकाश व्यवस्था करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान श्री रामलीला हनुमान जयंती समिति के अध्यक्ष ब्रजेश चतुर्वेदी, हबीब खां, रमाकांत तिवारी, दीपेंद्र कुमार, अभिषेक कुमार चौबे, विनीत आदि उपस्थित रहे।
कर्बला घाट की देखी तैयारियां
नगर पालिकाध्यक्ष ने मोहर्रम पर्व को देखते हुए तालाबपुरा स्थित कर्बला घाट का निरीक्षण किया। उन्होंने सफाई निरीक्षकों को निर्देशित किया कि कर्बला घाट की सीढ़ियों पर फैले कचरे के ढेरों को हटवा दिए जाए। कर्बला की सीढ़ियों की मरम्मत करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्वों की तैयारियों में किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए।