जिला प्रशासन निकाय चुनाव में अधिक से अधिक मतदान कराने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा था और लोगों से मतदान करने की अपील भी की जा रही थी। प्रशासन की इस अपील से शहर का मतदाता मतदान करने बूथ पर पहुंचे, लेकिन वहां अधिकांश मतदाताओं को अपना नाम नहीं मिला। इस कारण उन्हें मतदान करने से वंचित रहना पड़ा और वह लोकतंत्र के इस पर्व में शामिल होने की वजह निराशा लेकर वापस चले गए। इसके साथ ही इससे प्रशासन की निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया पर भी लोगों ने सवालिया निशान लगाए हैं।
गर्मजोशी व उत्साह के साथ मतदाता अपना वोटर कार्ड पहचान पत्र व आधार कार्ड लेकर पहुंचे, लेकिन मतदान केंद्र पर जब वह अपने बीएलओ के पास मतदान पर्ची लेने के लिए पहुंचे तो उन्हें वोटर लिस्ट से नाम नदारत रहा है। इससे अनेकों वोटर ऐसे थेे जो पहले लोकसभा, विधानसभा व निकाय चुनाव में भी पहले मतदान कर चुके हैं। नगर पालिका क्षेत्र में ऐसे एक दो नहीं बल्कि लगभग पांच प्रतिशत मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है और वह अपना अध्यक्ष व पार्षद नहीं चुन पाए हैं। वहीं कुछ लोग मतदाता सूची में गलत नाम अंकित होने की वजह से भी अपना मतदान नहीं कर सके हैं। अनेकों जगहों पर मतदाता या फिर उनके पिता का नाम गलत अंकित है।
पीएन इंटर कॉलेज मतदान बूथ के बाहर बेचैन खड़े वार्ड नंबर 18 के मतदाता कमलेश नामदेव ने बताया कि इससे पहले वह लोकसभा, विधानसभा व निकाय के चुनाव में मतदान कर चुके हैं, लेकिन निर्वाचन के जिम्मेदार कर्मियों की लापरवाही के चलते इस बार उनका मतदाता सूची से नाम हटा दिया गया है और वह अपने वोट नहीं दे सके हैं। इसी बूथ पर नझाई बाजार निवासी मोनिका साहू भी अपना वोटर कार्ड लेकर मतदान करने पहुंची, लेकिन मतदाता सूची में नाम नहीं होने के कारण उनको लोकतंत्र के इस महापर्व से दूर रहना पड़ा। हाल में ही विधानसभा चुनाव में उन्होंने मतदान किया था, लेकिन इस बार विभागीय लापरवाही के चलते उनका नाम सूची में शामिल नहीं हो सका है।
वहीं वार्ड नंबर तीन नेहरू नगर में रहने वाली दो सगी बहनों भारती नरवरिया व प्रतीभा नरवरिया ने बताया कि नगर निकाय के चुनाव में मतदान करने का यह उनका पहला मौका था। वोट डालने का काफी दिनों से इंतजार कर रहे थे और जब इंतजार का वक्त समाप्त हुआ तो वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने के कारण दोनों ही मतदान नहीं कर सके। इसमें जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही है।
वार्ड नंबर 26 क्षेत्र के मुहल्ला सरदारपुरा में रहने वाले सौरभ पाठक विगत 17 वर्षों से समस्त चुनाव में मतदान करते आ रहे हैं, लेकिन इस बार उनसे बोट डालने का हक छीन लिया गया है। इसी तरह नईबस्ती के मतदाता देवेंद्र साहू और उनके परिवार के अन्य तीन सदस्या पत्नी, भाभी व बहिन भी वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने के कारण वोट नहीं डाल सके हैं। इसी तरह शहर के समस्त 26 वार्डों के चार-पांच हजार मतदाता ऐसे हैं, तो वोटर होने के बाद भी वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने के कारण वोट नहीं डाल सके हैं। वहीं इनमें से अनेकों मतदाताओं ने इस पर जिला प्रशासन के द्वारा किए जा रहे निष्पक्ष मतदान पर सवालिया निशान भी लगाए हैं।