संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अदबी संस्था गलिस्तान-ए-अदब के बैनर तले शायर, गीतकार व लेखक असर ललितपुरी के सम्मान में एक शाम तेरे नाम एक शानदार कौमी एकता मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें शायरों व कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां पेश करते हुए समां बांधा।
जहीर ललितपुरी ने कहा कि पहली लहर, फिर दूसरी अब तीसरी भी आ गई, पर हौसलों के सामने बीमारियां टिकती नहीं। मध्य प्रदेश के शायर असरार चंदेरवी ने कलाम पढ़ते हुए कहा कि बाप के मरते ही रिश्तों का भरम टूट गया, भाई ने ईद पर बहनों को बुलाया ही नहीं। झांसी के शायर शकील कुरैशी ने कहा कि सभी ने आशियां अपना अलग हटकर बनाया है, हवा के शहर में कागज का हमने घर बनाया है। कोंच के मशहूर शायर जाहिद कोंचवीं ने कहा कि खूबसूरत जिंदगी का फलसफा रखता हूं मैं, दोस्त भी रखता हूं, लेकिन बावफा रखता हूं मैं। जब्बार शारिब ने इस तरह कहा कि कमी कुछ हो गई है परवरिश में, तभी बेटे का लहजा काटता है। शायर ललितपुरी ने कहा कि महक उठे वतन अपना मोहब्बत मांग लेते हैं, खुदा से हम दुआओं में ये दौलत मांग लेते हैं। स्थानीय शायर मास्टर शकील ने कहा कि तन्हाइयों में मुझ को क्या क्या न याद आया, पलकें झुका के उनका शरमाना याद आया। इनके अलावा सत्तार नजमी, चाहत ललितपुरी, रविंद्र पाठक, सोनिया शबनम एवं अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं पेश कीं, जिन्हें खूब सराहा गया। मुशायरा कनवीनर वसीम एवं अफसर रहे। इस मौके पर हाजी अनीश, अहसान, कौशल कव्वाल, मासूम कौसर, गनेश बाबू, शाकिर अली, अफसर झांसी, अमर प्रताप सिंह, श्रीपत, राजकुमार, गोकुल कुशवाहा, अनुज जैन, संजीव श्रीवास्तव, जहीर चिस्ती, अब्दुल खालिक, मनीष, सदाकत, सलीम, शकील आदि उपस्थित रहे। आयोजन अधिवक्ता वसीम असर एवं अफसर झांसी ने कराया।