संवाद न्यूज एजेंसी
महरौनी/सिलावन। वीरांगना लक्ष्मीबाई के पति गंगाधर राव की होलिका दहन के अगले दिन परवा पर मौत होने के शोक में बुंदेलखंड में इस दिन रंग न खेलने की परंपरा अब भी कायम है। वहीं, भैया दूज की पूजा होते ही होली की धूम मच जाती है।
बुंदेलखंड में खास तौर से ललितपुर, झांसी, हमीरपुर, महोबा आदि जिलों में होलिका दहन के बाद परवा के दिन शोक रहता है। उस दिन रंग-गुलाल की होली नहीं खेली जाती। सर्वत्र एक अजीब तरह का सन्नाटा रहता है। बुजुर्ग बताते हैं कि होलिका दहन के अगले दिन परवा को वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के पति राव गंगाधर की मृत्यु हो गई थी। बुंदेलों ने परवा को होली न खेल कर अपने राजा की मृत्यु पर शोक जताया था। तभी से पूरे बुंदेलखंड में परवा के दिन शोक रहता है। यहां भाई दूज से रंग-गुलाल की होली खेली जाती है जो रंग पंचमी तक चलती है। कहीं-कहीं बच्चे जरूर खेलते नजर आ जाते हैं।