तालबेहट (ललितपुर)। सूखे से त्रस्त क्षेत्र में लोग पानी के लिए परेशान है। कुछ इसके लिए प्रकृति को दोषी मान रहे हैं, वही दूसरी ओर खुद कुछ लोग भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। जिन्होंने अपने रसूख के चलते कई प्राचीन कूप और बावड़ियों का अस्तित्व समाप्त कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो उन कूपों ने भी जवाब दे दिया, जिनमें एक सप्ताह पूर्व कुछ पानी था।
नगर के कुछ लोगों ने बताया कि पहले नगर में अधिकांश घरों में एक निजी कूप हुआ करता था, परन्तु अधिकांश लोगों ने अपने घरों में बने निजी कूपों को बंद कर दिया। इस बार के सूखें ने लोगों को कूप की महत्वतता का अहसास करा दिया है। नगर के पेट्रोल पंप तिराहे पर एक सरकारी प्राचीन कूप था, जिसका पानी काफी मीठा था।
कुछ वर्षों पहले इस कूप का एक भाग क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद लोगों ने कई बार इस ओर पीडब्लूडी का ध्यान आकृष्ट कराया, परन्तु किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। धीरे धीरे कूप का अस्तित्व ही समाप्त हो गया।
इसी तरह नगर के मुख्य मार्ग पर कुरयाने की पुलिया के पास एक कूप था, जिसका अस्तित्व कुछ समय पहले समाप्त हो गया। नगर में ऐसे और भी कई प्राचीन कूप एवं बावड़ियां है जो सरकारी रिकार्ड में दर्ज है, परन्तु धरातल पर उनका कोई अता पता नहीं है। नगर में तेजी से घट रहे जल स्तर को ध्यान में रखते हुए कुछ लोगों ने अपने निजी कूपों को साफ कराना प्रारंभ कर दिया है।
इस संबंध में जब नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी केएन शर्मा से उनका पक्ष लिया तो उनका कहना था कि इस संबंध में उन्हें विस्तृत जानकारी नहीं है। फिर भी वह इस मामले की वह जांच कराएंगे। जो भी जिम्मेदार होगा उसे नोटिस दिया जाएगा।
वही नगर पंचायत के वरिष्ठ लिपिक विनोद तिवारी ने बताया कि नगर में 22 कूप एवं बावड़ी थी, जिसमें से मात्र दस इस समय अस्तिव में है। कुछ में पानी का संकट है और लगभग आधा दर्जन जमीदोज हो चुकी है।