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एक से बढ़कर एक दर्शनीय स्थल

Tue, 27 Sep 2016 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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scenic site, lalitpur news - फोटो : amar ujala
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ललितपुर। जनपद में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं। यहां विशाल नदियां, सुंदर तालाब, कलकल करते झरनों के साथ, सांस्कृतिक रंग और ऐतिहासिक धरोहरें किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। दशावतार मंदिर हो या जैन मंदिरों की श्रृंखला,  पर्यटकों को मोह लेती है, लेकिन दूरदर्शिता व शासन की इच्छाशक्ति के अभाव में इस पुरातत्व धरोहर का फायदा नहीं मिल पा रहा है।
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 5043 वर्ग किलोमीटर का यह क्षेत्र भौगोलिक दृष्टिकोण के अनुसार तीनों ओर से मध्य प्रदेश से घिरा हुआ है। यहां बेतवा, धसान एवं जामनी नदियां बहती हैं। यहां अनेक प्रसिद्ध पुरातात्विक महत्व के स्थल हैँ।  देवगढ ंमें दशावतार मंदिर,  ग्राम के पहाडी के ऊपर वराह मंदिर है। यहां पास ही सिद्ध गुफा, नाहर घाटी, राजघाटी में लेख तथा कलात्मक शंख लिपी देखने योग्य है। देवगढ़ पहाड़ी के ऊपर विस्तृत जैन मंदिर समूह है जिसमें शांतिनाथ भगवान की भव्य  प्रतिमा भी प्रतिष्ठित है। समीप ही बौद्ध गुफा भी दर्शनीय है। ग्राम कुंचदों में कुरैयावीर नामक देवालय है। परिसर में एक बावड़ी भी है। चारों और मूर्तियों के अवशेष भी हैं। धौजरी रणछोरधाम में प्रसिद्ध गरुडारूण विष्णु  प्रतिमा स्थापित है। साथ ही उमा-महेश की दूसरी प्रतिमा दर्शनीय है। पाली अंतर्गत पूर्वाभिमुख नीलकंठेश्वार मन्दिर है। पास ही नंदी विराजमान हैं।

ग्राम दूधई में तीन मंदिरों के भग्नावेष हैं। यहां पर सैंड स्टोन की एक बड़ी चट्टान को काटकर बनायी गयी लगभग हजारों वर्ष पुरानी 22 फीट ऊंची नरसिंह अवतार की विशाल प्रतिमा भी मौजूद है। ऐसी प्रतिमा शायद देश में कहीं नहीं है। ग्राम चांदपुर-जहाजपुर के अन्तर्गत हजारिया महादेव मंदिर, वराह मंदिर, भंडारिया मंदिर, विष्णुई मंदिर, शान्ति नाथ जैन मंदिर, बेलमढी जैसी पुरातात्विपक धरोहरें इतिहास को संजोये हुए हैं।
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इनके अलावा बालाबेहट, बानपुर, अण्डेला, बार, सीरोन कलां, सीरोन खुर्द, मडावरा, सौरंई, मदनपुर, पुरानी धामौनी, पांडव वन, ललितपुर नगर स्थित बांसा, रावर स्कूल स्थित बावड़ी, नगर तालबेहट स्थित 1957 की क्रान्ति का गवाह राजा मर्दन सिंह का किला आदि मौजूद हैं। जनपद में मूर्तिकला के अवशेष गुप्त काल से लेकर 12 वीं सदी तक के प्रतीत होते हैं।
ललितपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक अच्छेे पहुंच मार्ग का न होना ही इनके विकास की बड़ी बाधाओं में से एक है। यदि शासन द्वारा इनको पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करते हुए सही प्रकार से रखरखाव किया जाये व जनउपयोगी सेवाएं उपलब्ध कराई जायें तो इससे न सिर्फ सैलानियों की तादाद बढ़ेगी बल्कि शासन की आय भी बढ़ेगी जो इन धरोहरों को संवारने में मददगार साबित होगी।

फिरोज का जुनून खोज रहा नए स्थल
कंप्यूटर क्षेत्र में काम करने वाले फिरोज इकबाल जनपद के उन अनछुए स्थानों को खोज कर लोगों के सामने ला रहे हैं, जहां पर पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। इसी वर्ष फिरोज ने जनपद से करीब चालीस किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश के जंगलों में एक नए जल प्रपात को खोजा है। इस जल प्रपात को कन्कदण जल प्रपात कहते हैं। अभी तक यह जल प्रपात अटा कस्बे के स्थानीय चरवाहे व जंगल में लकड़ी बीनने वालों तक सीमित था, लेकिन अब यहां अवकाश के दिन बड़ी तादाद में  लोग पहुंच रहे हैं। कन्कदण के अलावा यहां पर चन्डी माता जल प्रपात, कुन्डखों जल प्रताप भी महत्वपूर्ण हैं। पयर्टन मित्र फिरोज बताते हैं कि नजदीक के जनपदों के पर्यटन स्थलों को जोड़ कर यहां पर्यटन विकास की नई तस्वीर पेश की जा सकती है।


विश्व पर्यटन दिवस हर वर्ष 27 सितंबर को मनाया जाता है। विश्व में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1980 में इसकी शुरूआत की थी। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य पर्यटन और संस्कृति के साथ साथ राजनीतिक व आर्थिक मूल्यों के विषय में जागरूकता फैलाना है। देश के कौने-कौने में पर्यटन को बढ़ावा देना भी है। भारत भी विश्व के पांच शीर्ष पर्यटन केन्द्रों में से एक है।
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