मड़ावरा। ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर के मुताबिक बिजली आपूर्ति न होने से किसानों के खेत में खड़ी मूंग सूख रही है। उनका कहना है कि नलकूप न चलने से वह खेत में पानी नहीं दे पा रहे हैं। करीब 10 घंटे सप्लाई मिलने पर लो वोल्टेज की समस्या खड़ी हो जाती। डीजल मंहगा होने से इंजन भी चलाकर खेत में पानी भरना मुश्किल हो रहा है। यदि यही हाल रहा तो इस बार मूंग की लागत भी नहीं निकल पाएगी।
कस्बे समेत क्षेत्र में अघोषित विद्युत कटौती के चलते उमस भरी गर्मी में आम जनमानस का हाल काफी बुरा है। लोकल फाल्ट और केबलों के जलकर गिरने से कस्बे में भी बमुश्किल 10-12 घंटे बिजली मिल पर रही है जबकि 20 घंटे विद्युत आपूर्ति का दावा विभागीय अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। रात्रि के समय मे किसी प्रकार की कोई कटौती नहीं किए जाने के शासन के निर्देशों के बावजूद ओवरलोडिंग के नाम पर कस्बे में रात में 10.30 बजे से 11.30 बजे तक इमरजेंसी कटौती के नाम पर कटौती हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति का हाल काफी बदहाल है गांवों में दिन और रात के हिसाब से मनमाना कटौती रोस्टर चलाया जा रहा है। किसी गांव में पूरे दिन भर तो किसी गांव में पूरी पूरी रात बिजली कटौती की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र में कई जा रही भयंकर विद्युत कटौती के चलते खेतों में खड़ी मूंग की फसल सूखने की कगार पर है। स्थानीय उपभोक्ताओं समेत पीटीडब्ल्यू संयोजनधारक किसानों ने अघोषित कटौती लगाम लगाते हुए निर्धारित रोस्टर के अनुसार विद्युत आपूर्ति की मांग जिला प्रशासन से की है।
अपने आठ एकड़ खेत में कर्ज लेकर मूंग की फसल बोई है। एक ओर फसल को कीटों से नुकसान हो रहा है तो वहीं पर्याप्त बिजली के अभाव में खेत सूखने की कगार पर है। इससे दिक्कत बढ़ रही है। -अच्छेलाल
पहले खेतों में साग-सब्जी लगाकर गुजारा करते थे इस बार तीन एकड़ रकबे में मूंग की फसल बोई थी जो अब पानी के अभाव में सूखने लगी है। जनरेटर चलाकर फसल में पानी लगाना मुश्किल पड़ रहा है। बच्चू कुशवाहा