ललितपुर। धनतेरस से शुरू हुआ दीपोत्सव का पर्व भाई दूज तक हर्षोल्लास के साथ चलता रहा। प्रथमा और भाई दूज के अवसर पर बुंदेली मौनिया लोकनृत्य के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया।
दीवाली के त्योहार को लेकर लोगों में अलग तरीके का उत्साह रहता है। बुंदेलखंड में दीवाली की अलग-अलग परंपराएं हैं। दीवाली के अगले दिन प्रथमा मनाई जाती है। इस दिन मौन व्रत लेकर साधक 13 गांव अथवा मुहल्लों में मौनिया नृत्य करते हैं। भाई दूज पर इसका अलग की महत्व है।
शुक्रवार को जिले भर में बुंदेलखंडी मौनिया नृत्य की धूम रही। लोकनृत्य (मोनिया नृत्य) के माध्यम से कलाकारों ने बुंदेली परंपरा को जीवंत रहा। गांव और मुहल्लों में अपनी-अपनी टोली के साथ पहुंचे कलाकारों ने नृत्य की मनमोहक छठा बिखेरी। मोर के पंख हाथ में लेकर सैरा नृत्य करती टोलियों को देखने के लिए भीड़ लगी रही। करीब 15-20 मिनट तक चलने वाला यह नृत्य इतना मोहक है कि हर कोई देखना चाहता है।
इस नृत्य में मनोरंजन के लिए एक ऊंटपटांग कपड़ा पहने जोकर होता है। दर्शकों को अपनी ओर खींचने वाले इस नृत्य को देखने के लिए लोग जुटे रहे। लेड़ियापुरा मुहल्ला में मौनिया नृत्य हुआ, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ रही।