ललितपुर। नेशनल ग्रीन कोर योजना एक साल में एक भी पर्यावरण मित्र स्कूल का मॉडल जिले में तैयार नहीं कर सकी है। इस वजह से विद्यालयों में गठित इको क्लब की गतिविधियां कागजों में सिमटकर रह गई हैं। इस कारण विद्यालयों में अध्ययनरत अन्य छात्र-छात्राओं का जुड़ाव भी पर्यावरण संरक्षण नहीं हो पाया है।
पर्यावरण के बिगड़ रहे संतुलन से प्राकृतिक आपदाओं की संख्या में तेजी आई है, जिससे जानमाल का नुकसान हो रहा है। इसके मद्देनजर पर्यावरण सुधारने के प्रयास हो रहे हैं, जिसमें विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को नेशनल ग्रीन कोर योजना के माध्यम से जोड़ा गया है। इस योजना में गत वर्ष जिले के 75 विद्यालयों को शामिल किया गया था। जिसमें 53 स्कूलों को गतिवधियां संचालित करने के लिए 2,500 रुपये के हिसाब से आर्थिक सहायता प्रदान की गई। विद्यालयों में इको क्लब गठित कर दिए गए, कुछ विद्यालयों ने इसकी गतिविधियां कराई, लेकिन, अधिकांश विद्यालय उदासीन बने रहे। इस पर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक गजेंद्र कुमार ने 21 विद्यालयों के प्रधानाचार्य को नोटिस जारी कर दिया। इसमें उन्होंने कहा था कि विद्यालयों को आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने के बाद भी न तो फोटोग्राफ और न ही गतिविधियों के संचालन की जानकारी दी गई, जिससे प्रधानाचार्यों में हड़कंप मच गया। आननफानन में प्रधानाचार्यों ने कागजी कार्रवाई पूर्ण कर सूचना उपलब्ध करा दी, उसके बाद से विद्यालयों में पर्यावरण संबंधी गतिविधियां शून्य हैं। न तो बच्चों को पर्यावरण एवं पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति अवगत कराया जा रहा है और न ही पर्यावरणीय शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वह समाज में जागरूकता फैला सकें।
इको क्लब की गतिविधियां एक नजर में
इको क्लब के सदस्यों को गतिविधियों एवं जड़ी-बूटी के पौधे लगाकर अपने विद्यालयों को हरा-भरा बनाना है। खासतौर पर विश्व पर्यावरण दिवस, विश्व जल दिवस आदि अवसर पर संगोष्ठी, वाद विवाद प्रतियोगिता शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें वन, वन्य जीव उद्यान, एनर्जी पार्क और खनन क्षेत्रों का भ्रमण करना है। व्यक्तिगत स्वच्छता के लिए रैली, मानव श्रंखला व नुक्कड़ नाटक किए जाने हैं। विद्यालय में छोटी सी फल वाटिका, बीज बैंक, वृक्षोद्यान की आदि शुरुआत करनी है। इसके अतिरिक्त केस स्टडी तैयार करना, पर्यावरण मित्र उत्पादों की सूची बनाना, पर्यावरण प्रभाव डालने वाले सामाजिक समूहों की गतिविधियों के बारे में जानकारी एकत्र करना, औषधीय पौधों के आंकड़े एकत्र करना, मृदा जल एवं वायु की गुणवत्ता का परीक्षण व उनका स्वास्थ्य पर प्रभाव जानना आदि है।
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इको क्लब को आर्थिक सहायता
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार प्रत्येक जिले में स्थापित 250 इको क्लबों को राज्य नोडल एजेंसी के माध्यम से सालाना 2,500 रुपए आर्थिक सहायता प्रदान करती है। प्रत्येक इको क्लब को संसाधन सामग्री किट भी दी जाती है, जिसमें गतिविधि निर्देशिका व पोस्टर दिए जाते हैं।
यह है अनुश्रवण समिति
ईको क्लब की देखरेख के लिए समिति गठित की गई है। इसमें डीएम अध्यक्ष, सदस्य/ सचिव जिला विद्यालय निरीक्षक, सदस्यों में डीएफओ, सीएमओ, बुंदेलखंड सेवा संस्थान, मार्गश्री चैरिटेबल दल झांसी, जीआईसी प्रधानाचार्य, जीजीआईसी प्रधानाचार्य, नगर पालिका बालिका इंटर कालेज प्रधानाचार्य, वर्णी कालेज प्रधानाचार्य, पीएन इंटर कालेज प्रधानाचार्य, बीएसए, विज्ञान क्लब समन्वयक शामिल हैं।
नेशनल ग्रीन कोर योजना के कार्यक्रमों को गति दिलाई जाएगी। इस संबंध में शीघ्र ही डीएम की अध्यक्षता में बैठक होगी, जिसमें प्राप्त निर्देशों को ध्यान में रखकर योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
- चंद्रचूड़ दुबे
जिला विद्यालय निरीक्षक ललितपुर।