ललितपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में कामगारों को रोजगार पाने के लिए अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ रहा है। योजनांतर्गत 46,144 परिवारों ने रोजगार की मांग की है, जिसमें 35,681 परिवारों को अभी तक काम मिल सका है। ऐसे में 10 हजार से अधिक परिवार रोजगार का इंतजार कर रहे हैं।
सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद जिले के श्रमिकों को राहत नहीं मिल पा रही है। कामगारों को काम मांगने के बाद भी कई दिनों तक रोजगार के लिए घर बैठना पड़ रहा है। जिले में पंजीकृत 1,77,457 में से 46,144 परिवारों ने काम की मांग की है, जिसमें से 18,990 परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। साथ ही 16,691 परिवार इस समय काम कर रहे हैं। इस तरह करीब 10,463 परिवारों को रोजगार का इंतजार है।
डीएम डा. रूपेश कुमार ने रोजगार देने की गति बढ़ाने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम पंचायत में तालाब खुदाई/जीर्णोद्धार कराने के निर्देश बीडीओ को दिए थे। इसके अनुपालन में 101 ग्राम पंचायतें तालाब खुदाई/जीर्णोद्धार कराने के लिए आगे आई हैं, जिससे 112 तालाबों का काम शुरू हो गया है। लेकिन, तालाबों पर नियमित काम नहीं चल पा रहा है।
इससे रोजगार की समस्या जस की तस बनी हुई है। कई गांवों में मजदूरों को रोजगार के लिए आज-कल का आश्वासन दिया जा रहा है। इन हालात में मजदूर महानगरों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। तमाम गांवों में श्रमिक परिवारों में एक-दो सदस्य ही बचे हैं। कइयों के घरों पर ताला लटका है।