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मानसून करीब, कुएं नहीं हुए साफ

Thu, 16 Jun 2016 01:06 AM IST
lalitpur
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well, lalitpur news - फोटो : amar ujala
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ललितपुर। सूखे की विभीषिका से जूझ रहे प्रशासन ने आने वाले दिनों में इससे बचने के लिए सबक नहीं लिया है। सूखा के कारण भू-जल स्तर नीचे पहुंच गया है, जिससे शहर के अधिकतर हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो गया है। शहरवासियों को पेयजल की समस्या से निजात दिलाने के लिए दो माह पूर्व कुओं की सफाई का कार्य शुरू  किया गया था, लेकिन मानसून दस्तक देने के करीब है और अभी तक कुओं की सफाई का कार्य पूर्ण नहीं हो सका है।
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नगर क्षेत्र में करीब आधा सैकड़ा प्राचीन कुएं हैं, लेकिन इनका उपयोग नहीं हो पाने के कारण लगभग सभी कुओं में गंदगी जमा हो गई है और कई कुएं तो कचरा घरों में तबदील हो चुके हैं। पानी की कमी के कारण लोगों को प्राचीन कुओं की अहमियत का अहसास होने लगा था।

इस पर नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने माह अप्रैल में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर करीब एक दर्जन मुख्य सार्वजनिक कुओं की सफाई कराने के निर्देश दिए थे, ताकि लोगों को पेयजल के लिए विकल्प मिल सके। कुओं की सफाई के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था, लेकिन दो माह पूर्ण होने वाले हैं और अभी तक कुओं की सफाई कार्य पूरा नहीं हो सका है।
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मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार अगले सप्ताह तक जनपद में मानसून दस्तक दे सकता है। ऐसे में नगर पालिका द्वारा कुओं की सफाई में व्यय किए गए पैसों को व्यर्थ ही माना जाएगा।

इन कुओं की होनी थी सफाई
नगर के करीब एक दर्जन मुख्य सार्वजनिक कुओं की सफाई नगर पालिका द्वारा कराई जानी थी। इसमें मुहल्ला महावीरपुरा में स्थित नगर पालिका बालिका इंटर कालेज की प्राचीन बावरी, तालाबपुरा तिराहे पर स्थित कुआं व छतदार कुआं, नझाई बाजार में टाकीज के सामने का कुआं, गांधीनगर में ग्राम सभा का कुआं, सिविल लाइन एसबीआई बैंक के पास का कुआं, मुहल्ला रामनगर में बूड़े बाबा का कुआं, विष्णुपुरा का कुआं, नेहरू नगर स्थित हड्डी मील के पास का कुआं और लेड़ियापुरा का कुआं शामिल हैं।

विवादित कुओं से दूर रही नगर पालिका
नगर में करीब आधा सैकड़ा सार्वजनिक कुएं मौजूद हैं, इनमें से तकरीबन तीन दर्जन से अधिक सार्वजनिक कुओं पर स्थानीय लोगों अथवा दबंगों द्वारा अवैध तरीके से कब्जा कर लिया गया है। ऐसे कुओं में पानी उपलब्ध होने के बाद भी उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। नगर पालिका अवैध कब्जा धारियों के साथ किसी तरह का विवाद मोल लेना नहीं चाहती है।

यही कारण है कि पालिका ने आधा सैकड़ा कुएं होने के बावजूद मात्र एक दर्जन कुओं की ही सफाई कराने जिम्मेदारी उठाई है। नझाई बाजार में टाकीज के सामने स्थित प्राचीन कुएं का नाम सफाई कराने वाले कुएं की सूची में शामिल है, इसके बावजूद नगर पालिका द्वारा इस कुएं की सफाई नहीं कराई गई है। इसका मुख्य कारण यही है कि इस कुएं के चारों ओर स्थानीय व्यापारियों द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। नगर पालिका उक्त कब्जा धारियों से किराया भी वसूलती है।

यह थी कार्ययोजना
पानी की किल्लत से जूझ रहे नगरवासियों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कुओं की सफाई कराने की कार्ययोजना तैयार की गई थी। इसके पीछे नगर पालिका का उद्देश्य यह था कि शहर में जहां का भू-जल स्तर काफी गिर गया है और जहां पर जल संस्थान की पाइप लाइनों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है, ऐसे स्थानों पर स्थित सार्वजनिक कुओं में जल संस्थान मशीन डालकर पाइप लाइनों के माध्यम से पानी की आपूर्ति कर सके और स्थानीय लोग कुएं का पानी भी उपयोग कर सकें।

इसी उद्देश्य से नगर के मुख्य कुओं की सफाई का कार्य शुरू किया गया था। मुहल्ला रामनगर के सार्वजनिक कुएं व महावीरपुरा में स्थित प्राचीन बावरी के माध्यम से पूर्व में वार्ड नंबर 01, 02, 05, 07, 25 व 26 के दर्जनों मुहल्लों में रहने वाले हजारों परिवारों को अस्थायी तौर पर जलापूर्ति की जाती थी।

नगर के करीब दस कुओं की सफाई का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। हाल में ही पानी को स्वच्छ करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कर दिया गया है। अंतिम बार कुओं का पानी निकालने के बाद कुओं में पंप मशीन डालने के लिए जल संस्थान को पत्र भेज दिया जाएगा।
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- राकेश कुमार
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद
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