ललितपुर। लॉकडाउन में मनरेगा योजना श्रमिकों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। जहां कृषि, उद्योग एवं निर्माण कार्यों में रोजगार न के बराबर रह गए हैं, वहीं मनरेगा के तहत ग्रामस्तर पर श्रमिकों को रोजगार मुहैया होने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। इस समय जिले की 412 ग्राम पंचायतों में भूमि समतलीकरण, कुआं निर्माण जैसे कराए जा रहे हैं।
वर्षंो पहले यूपीए सरकार ने बुंदेलखंड में श्रमिकों के पलायन को रोकने के लिए मनरेगा की शुरुआत की थी। उस दौरान बड़े पैमाने पर श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हुआ था। आज वैसे ही हालात फिर से बन गए हैं। जनपद में निवास करने वाले लोग, जो अन्य प्रदेशों में कार्य रहे थे, वह कोरोना संक्रमणकाल में महानगरों से घर वापस लौट आए हैं। वर्तमान में ग्रामों में अकुशल एवं कुशल श्रमिकों की कोई कमी नहीं है। इस समय ग्रामों में पर्याप्त संख्या में श्रमिक उपलब्ध हैं, जिन्हें रोजगार की आवश्यकता है।
यदि श्रमिकों को ग्राम स्तर पर रोजगार मुहैया नहीं कराया गया तो दोबारा श्रमिक पलायन के लिए विवश हो सकते हैं। इसे ध्यान में रखकर मनरेगा के तहत श्रमिकों को ज्यादा से ज्यादा काम मुहैया कराने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, लॉकडाउन के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, उद्योग एवं निर्माण कार्यो में न के बराबर काम रह गए हैं। हालांकि, शासन द्वारा रोजगार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न उद्योगों सहित निर्माण कार्यो को सशर्त मंजूरी प्रदान की गई है। इसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की समस्या बनी हुई है।
उधर, मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार पांडेय ने खंड विकास अधिकारियों के माध्यम से ग्राम प्रधानों को अपनी - अपनी ग्राम पंचायत में स्वीकृत लेबर बजट से दस-दस कार्यो के एस्टीमेट तैयार करने के लिए निर्देशित किया गया है। उन्होंने श्रमिकों से मांग पत्र प्राप्त कर उन्हें ग्राम अंदर ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कहा है। इसके अनुपालन में जिले की 412 ग्राम पंचायतों में विभिन्न काम प्रारंभ हो गए हैं।
ब्लाक बार के अंतर्गत ग्राम पंचायत डुलावन में बीस श्रमिकों को राकेश पुत्र सुकई के खेत पर समतलीकरण का कार्य कराया जा रहा है। ब्लाक मड़ावरा अंतर्गत ग्राम रनगांव में नानूराम के खेत पर मेड़ बंधी पर पच्चीस श्रमिक काम कर रहे हैं। ब्लाक बार के ग्राम कारीटोरन में भी मनरेगा के तहत श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
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ये चल रहे काम
जिले में तालाब निर्माण, नाला गहरीकरण, बंधी/ मेड़ निर्माण, गूल निर्माण, कूप निर्माण, चेकडैम सिल्ट सफाई के काम चल रहे हैं। इस तरह पूरे जनपद में 752 जल संचयन/ जल संरक्षण के काम कराए जा रहे हैं।
इस समय गांव में कृषि कार्य पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। अन्य कार्य कोई बचे नहीं हैं। इस कारण जहां काम मिल रहा है, वहां काम करने के लिए पहुंच रहे हैं। मनरेगा में भूमि समतलीकरण व कुआं निर्माण का काम चल रहा है, इसमें कई मजदूरों को काम मिला है।
- हरीराम रैकवार
गांव में मनरेगा के कई काम चल रहे हैं, जिससे श्रमिकों को इसमें काम मिलना शुरू हो गया है। कुआं निर्माण में कई महिलाओं को भी काम मिला है। वरना, इससे पहले महिलाएं घर बैठी थीं, उनके पास कोई काम नहीं था। कुछ यही हाल हमारा था।
- फूलाबाई
मनरेगा में काम कर रहे हैं, जिससे घर का गुजारा चल रहा है। लॉकडाउन में अन्य कोई काम नहीं चल रहे हैं। ऐसे में मनरेगा ही एकमात्र रोजगार का जरिया बची है।
- महेंद्र नामदेव
लॉकडाउन ने मजदूरों की कमर तोड़कर रख दी है। दूसरों से कर्ज लेकर घर का खर्च उठा रहे हैं। अब मनरेगा में काम मिला है, जिससे कर्ज चुकने की उम्मीद जगी है।
- कल्लू रैकवार
मनरेगा में शासन ने मजदूरी भी बढ़ा दी है, इसलिए अब मजदूरों को इस योजना में काम करने में कोई एतराज नहीं है। वर्तमान में इसका समय से भुगतान करने की भी बात कही जा रही है।
- अनुराग विश्वकर्मा
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प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक-एक तालाब का नितर्माण करानो के निर्देश दिए गए हैं। प्रतिदिन कम से कम दो सौ श्रमिकों को सोशल डिस्टेंस का पालन कराते हुए रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ग्राम प्रधानों से कहा गया है।
- अनिल कुमार पांडेय
मुख्य विकास अधिकारी
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मनरेगा में धनराशि की कोई कमी नहीं है। हाल ही में श्रमिकों को साठ लाख रुपये का भुगतान किया गया है।
- इंद्रमणि त्रिपाठी
उपायुक्त श्रम एवं रोजगार