फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फसल आने से बढ़ी मंडी की रौनक बढ़ी

Thu, 02 Mar 2017 12:56 AM IST
lalitpur
विज्ञापन
मंडी - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
नोटबंदी के बाद पहली फसल आने से गल्ला मंडी में रौनक लौट आई है। किसान व व्यापारी भी खुश नजर आ रहे हैं। इस बार मटर और मसूर के दामों में पिछले साल की तुलना में गिरावट है। जबकि गेहूूं, चना व जवा के भाव स्थिर रहे।       
विज्ञापन


जनपद में गेहूं, मटर, चना और मसूर की थ्रैसिंग हो चुकी है और इन्हें लेकर किसान गल्ला मंडी पहुंचने लगा है। इस बार जहां किसान उचित मूल्य पाने की आशा रख रहा है वहीं व्यापारियों द्वारा भी मुनाफे की उम्मीद जताई जा रही है। मंगलवार को मंडी में मटर की आवक करीब सात हजार क्विंटल रही और 2200 रुपए प्रति क्विंटल पर बिकी, मसूर की आवक चार हजार क्विंटल रही, और दाम 3650 रुपये प्रति क्विंटल रहे। जवा की आवक तीन हजार क्विंटल रही, जबकि 1425 रुपये प्रति क्विंटल बोली रही। इसी प्रकार चना की आवक काफी कम, एक हजार क्विंटल रही, जबकि दाम 4500 रुपये प्रति क्विंटल रहे। गेहूं भी आने लगा है, मंगलवार को करीब एक हजार क्विंटल गेहूं की आवक रही, जबकि इसके दाम 1490 से 1500 प्रति क्विंटल रहे।

सरकारी गेहूं की खरीद 1625 रुपए प्रति क्विंटल चल रही है। वहीं बटरी की कुल आवक भी एक हजार क्विंटल आना बताया गया है। वहीं भाव में पीली बटरी के दाम 2700 रुपए प्रति क्विंटल और काली बटरी के दाम 2450 रुपए प्रति क्विंटल तक रहे। किसान उड़द भी लेकर पहुंच रहा है और मंगलवार को करीब एक हजार से 1200 क्विंटल तक इसकी आवक रही, जबकि दामों में सीजन के सापेक्ष काफी गिरावट रही। वर्तमान में उड़द के भाव 4500 से 4700 रुपए प्रति क्विंटल चली, पिछले साल नोटबंदी के पहले तक उड़द 11 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थी।       
विज्ञापन



कहीं लाभ, कहीं अधूरी सिंचाई से नुकसान      
ललितपुर। मंडी में आने वाले किसानों को कहीं लाभ तो कही नुकसान हुआ है। इसके लिए उन्होंने पानी की उपलब्धता को बड़ा कारण बताया। कई गांवों में किसानों को कुंआ द्वारा सिंचाई करनी पड़ी, कुछ गांवों में टूयूब वेल व नदी होने के चलते 20 से 25 गुना फसल की पैदावार हुई है। मंडी में फसल लेकर पहुंचे कुछ किसानों ने इस बार की फसल पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जो इस प्रकार है।      


कुुआं के पानी से करनी पड़ी सिंचाई      
ललितपुर। ब्लॉक बार अंतर्गत ग्राम लड़वारी निवासी बालचंद ने बताया कि उन्होंने बटिया से लेकर खेती की है, उन्हें इस बार कुआं से खेतों की सिंचाई करनी पड़ी है। पिछले साल तक ललितपुर के गोविंदसागर बांध की नहर के पानी से सिंचाई हो जाती थी, लेकिन इस बार उक्त नहर का पानी ही गांव तक नहीं पहुंच सका, जिसके चलते उन्हें इस बार तीन क्विंटल गेहूं की बुवाई करने पर मात्र 20 क्विंटल की पैदावार हुई है। जबकि इससे पिछले साल यही पैदावार 35 से 40 क्विंटल तक रही थी।       
-      
ऋएक बार ही कर पाए सिंचाई     
ललितपुर। ब्लॉक बार के ही ग्राम भैलोनी निवासी रिंकू कुशवाहा ने बताया कि इस बार उन्होंने चार क्विंटल जवा की बुबाई की थी, पर उन्हें मात्र छह क्विंटल जवा की पैदावार से संतुष्ट होना पड़ा रहा है। उन्होंने भी पानी की समस्या को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि जवा के लिए कुल पांच बार सिंचाई की आवश्यकता होती है, जबकि नहर में पानी नहीं पहुंचने से उन्हें भी एक ही बार की सिंचाई का लाभ मिल सका।
-      
नदी के पानी से फसल संतोष जनक      
ललितपुर। बानपुर निवासी पूरन चंद ने बताया कि उन्हें जामनी नदी के कारण अच्छा पानी मिला, जिसके चलते इस बार फसल की पैदावार काफी अच्छी रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें इस बार मसूर की फसल 20 से 25 गुना अधिक हुई है। दो क्विंटल की बुवाई में उन्हें 50 क्विंटल की पैदावार का लाभ हुुआ है।       

पैदावार ही कम रही      
ललितपुर। ग्राम रघुनाथपुरा निवासी रामसिंह ने बताया कि उनके पास सिंचाई के लिए बोर का साधन भी है, इसके बाद भी पिछले वर्ष की तुलना में मसूरी की फसल में पांच गुना नुकसान हुआ है। हालांकि मंडी में मिले दामों से वह संतुष्ट हैं। इस बार एक बोरा मसूर बोने पर उन्हें मात्र दस क्विंटल मसूर की पैदावार से ही संतुष्ट होना पड़ा है। हालांकि वह गेहूं में 15 से 20 गुना फसल होने को लेकर आशान्वित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें