स्वास्थ्य विभाग दो साल से भेज रहा ‘जीरो’ रिपोर्ट, निजी लैब व मेडिकल स्टोरों पर दिख रहे मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अगर आंकड़ों की बाजीगरी कहीं देखनी हो तो स्वास्थ्य विभाग में देखी जा सकती है। विभाग पिछले दो वर्षों से जनपद में मलेरिया के मरीजों की संख्या शून्य दिखाते हुए शासन को रिपोर्ट भेज रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। हर साल जिले में सैकड़ों लोग मलेरिया जैसे लक्षणों से पीड़ित दिखाई देते हैं और चिकित्सकों के परामर्श पर मेडिकल स्टोरों से हर महीने हजारों रुपये की दवाएं भी बिक रही हैं।
सरकारी अस्पतालों की लैब में मलेरिया पॉजिटिव की रिपोर्ट लगभग नहीं दी जाती। वहीं निजी पैथोलॉजी लैब में भी कई बार मलेरिया पॉजिटिव लिखने के बजाय अन्य संकेत देकर रिपोर्ट दी जाती है। ऐसे में मरीज लक्षणों के आधार पर ही जांच कराकर दवा ले रहे हैं। जिले में मलेरिया को लेकर सरकारी आंकड़े भले ही राहत देने वाले हों, लेकिन हकीकत कुछ और कहानी बयां कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में पिछले दो वर्षों से जिले में मलेरिया के मरीज शून्य बताए जा रहे हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों में स्थापित लैब से भी पॉजिटिव रिपोर्ट सामने नहीं आ रही है। कई लोग मलेरिया जैसे लक्षण होने पर निजी लैब से जांच कराते हैं और उसी के आधार पर चिकित्सक दवा लिख देते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्ष 2030 तक देश को मलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी कारण वर्ष 2024 और 2025 में जनपद से शून्य रिपोर्ट भेजी गई। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के बाद मलेरिया के मरीजों की संख्या कम जरूर हुई है, लेकिन बीमारी पूरी तरह खत्म होने से वे भी इन्कार करते हैं।
जनपद में मलेरिया की दवाओं की बिक्री होती है। कोरोना संक्रमण के बाद बिक्री में कमी आई है, लेकिन यह कहना गलत होगा कि मलेरिया पूरी तरह समाप्त हो गया है। हर वर्ष मलेरिया की दवाओं की मांग आती है और करीब दो लाख रुपये से अधिक की दवाएं बिक जाती हैं। हालांकि विभागीय रिपोर्ट पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।
संभव सिंघई, जिलाध्यक्ष केमिस्ट एसोसिएशन।
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पिछले दो वर्षों में मलेरिया का कोई मरीज नहीं मिला है। कुछ चिकित्सक एंटीजन किट के आधार पर दवा दे रहे होंगे, लेकिन यह मान्य नहीं है। मलेरिया पॉजिटिव मरीज की रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज कर भेजी जाती है। मरीज किस आधार पर दवा ले रहे हैं, यह कहना संभव नहीं है।
डॉ. इंतियाज अहमद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।