संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मकर संक्रांति का पर्व बृहस्पतिवार को श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया जाएगा। मकर संक्रांति का पुण्यकाल पंद्रह जनवरी को तड़के चार बजे से होगा, जो शाम तक रहेगा। ऐसे में लोग पुण्यकाल से तिल का लेपन कर आस्था की डुबकी लगाएंगे और तिल व खिचड़ी का दान करेंगे।
भगवान सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति का पर्व होता है। नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश शास्त्री ने बताया कि जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो उस समय को मकर संक्रांति कहते हैं। यह देवताओं की मध्यरात्रि मानी जाती है।
यहां से देवता अपने दिन की ओर उन्मुख होने लगते हैं। इस दिन तिल के प्रयोग का विशेष महत्व माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन भगवान शिव को गाय के घृत से अभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। ताम्रपात्र में तिल भर कर दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
प्रो. शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष सूर्य धनु राशि से मकर राशि में माघ कृष्ण 14 जनवरी की रात्रि 9:29 बजे प्रवेश करेंगे। ऐसे में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही मकर संक्रांति पर्व प्रारंभ हो जाएगा। बताया कि धर्मशास्त्र के अनुसार, सूर्यास्त के बाद सूर्य के राशि परिवर्तन से दूसरे दिन ही पुण्यकाल होता है। ऐसे में मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष 15 जनवरी माघ कृष्ण द्वादशी को मनाया जाएगा।
इस वर्ष ज्येष्ठा नक्षत्र एवं वृद्धि योग एवं कौलव करण में चंद्रमा जिस समय वृश्चिक राशि पर संचार करेगा, उस समय मकर संक्रांति का पर्व प्रारंभ होगा। इस बार मकर संक्रांति पर सूर्य और मंगल की विशेष युति बन रही है। सूर्य मकर राशि पर आएंगे, जब कि चंद्रमा वृश्चिक राशि रहेंगे। यह अद्भुत युति है, जिससे अति दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन वृद्धि योग है। ज्योतिष शास्त्र में वृद्धि योग श्रेष्ठता का प्रतीक माना गया है। वृद्धि योग के प्रभाव से राष्ट्र की समस्त बाधाएं दूर होंगी।