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मेडिसन कचरा निस्तारण में बरती जा रही उदासीनता

Tue, 01 Dec 2015 12:01 AM IST
ब्यूरो
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सिलावन (ललितपुर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी से निकलने वाले मेडिसन कचरे को स्वास्थ्य विभाग के परिसर में ही जलाया जा रहा है। इससे न सिर्फ मरीजों, बल्कि पास में स्थित परिषदीय विद्यालय के नौनिहालों और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
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लेकिन, इस ओर न तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ध्यान दे रहे हैं और न ही उच्चाधिकारी, जबकि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बावजूद इसके मेडिसन कचरे को जलाया जा रहा हैं।

देश के प्रधानमंत्री जलवायु परिवर्तन से लड़ाई के लिए सभी को जिम्मेदारी सौंप रहे हैं। लेकिन, स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी और अफसर मेडिसन कचरा के निस्तारण की दिशा में कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। संक्रमित कचरे को स्वास्थ्य केंद्र के पीछे एकत्रित कर उसे नष्ट करने के लिए आग लगा दी जाती है
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जबकि स्वास्थ्य केंद्र के पास ही विभिन्न कार्यालय, आवासीय कालोनी और परिषदीय विद्यालय स्थित है। इस जलते हुए संक्रमित कचरे का धुआं खिड़की के रास्ते पास स्थित जच्चा-बच्चा वार्ड में जाता है, जिससे नवजात शिशुओं के साथ प्रसूता व अन्य मरीजों की सांसों में जहर घुल रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्र से सटे परिषदीय विद्यालय के नौनिहालों और पास में स्थित विभिन्न कार्यालयों व आवासीय कालोनी के लोगों की सांसों में जहर घुल रहा है।

यह बीमारियां फैलाता है कचरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों से निकलने वाले कचरे को जलाने से वायु, जल और भूमि का प्रदूषण होता है। इसमें पाए जाने वाले रसायन, कीटनाशक, जहरीले और घातक पदार्थ, जिसमें साइटोटॉक्सिक व रेडियोएक्टिव कचरा भी शामिल है, इसके जलने से मनुष्य के स्वास्थ्य को कई प्रकार से नुकसान पहुंचता है।

इससे एड्स, हेपेटाइटिस बी, सी, तपेदिक और त्वचा व आंख से संबंधित बीमारियों की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है। नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश और प्रधानमंत्री की बात को सार्थक करने के लिए जिलाधिकारी का ध्यानाकृष्ट कराया है।

मेडिसन कचरे के निस्तारण के लिए नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश हैं। यदि कोई लापरवाही कर रहा है तो इसे देखा जाएगा। साथ ही नियमानुसार निस्तारण कराया जाएगा।  
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- डा. सत्येंद्र कुमार
मुख्य चिकित्साधिकारी
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