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पाइप लाइन डालने को खड़ी फसल में चलाई जेसीबी

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खेतों में खड़ी जेसीवी मशीन - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। थाना जाखलौन अंतर्गत ग्राम बम्हौरीकलां में सोमवार की रात को एलपीजी पाइप लाइन डालने के लिए कंपनी द्वारा किसानों की खड़ी फसल पर जेसीबी चलाकर खुदाई शुरू कर दी। इसके चलते किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
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कांडला से गोरखपुर के लिए कंपनी द्वारा गैस पाइप लाइन डाली जा रही है। यह जनपद के 41 गांवों से होकर निकल रही है। इसके लिए कंपनी जेसीबी मशीन से खुदाई करा रही है। इसके लिए कंपनी द्वारा ग्रामीण किसानों से नोटिस देकर सहमति पत्र भी लिए जा रहे हैं और सहमति के बाद ही कंपनी द्वारा किसानों की जमीनों पर खुदाई का काम शुरू किया जाएगा, लेकिन बहुत से स्थानों पर किसानों से सहमति पत्र लिए बिना ही खड़ी फसलों पर जेसीबी मशीन चलाकर गैस पाइप लाइन बिछाई जा रही है। इस पाइप लाइन बिछाने के लिए किसानों की चालीस फुट चौड़ी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा जिसमें लगभग 21 फुट जमीन पर खुदाई की जाएगी, बाकी जमीन पर कंपनी आवागमन में उपयोग में लाएगी। ऐसा ही एक मामला मंगलवार को थाना जाखलौन अंतर्गत ग्राम बम्हौरीकलां व बरखेरा में देखने को मिला, जब किसानों को नोटिस तो भेजे गए, लेकिन बिना किसानों की सहमति एवं बिना मुआवजा दिए ही रातों रात गैस पाइप लाइन के लिए जेसीबी मशीन से कई खेतों की खड़ी फसलों पर जेसीबी चलाकर खुदाई शुरू कर दी गई। जब किसान सुबह होने पर अपने खेतों में पहुंचे तो वहां जेसीबी चलती देखी, जिस पर ग्रामीण उन्हें बिना नोटिस या जानकारी के ही जेसीबी मशीन चलाने और फसल खराब देख आक्रोशित हो गए और इसका विरोध जताया जिसके बाद कंपनी ने वहां खुदाई फिलहाल रोक दी है।
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कंपनी द्वारा खेती की जमीन पर रात में ही खुदाई शुरू कर दी, जिससे फसल को काफी नुकसान हुआ है। कंपनी द्वारा जितनी जगह पर गैस पाइप लाइन बिछाई जा रही है, उतनी जगह और खराब होने वाली फसल का आंकलन कर प्रशासन को उचित मुआवजा दिलाना चाहिए। -महेश मिश्रा, किसान, ग्राम बम्हौरीकलां।
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पहले बताया कि पहले मुआवजा मिलेगा, उसके बाद खुदाई की जाएगी लेकिन मुआवजा के बिना ही बिना सूचना के रातों रात काम लगा दिया और कई एकड़ की फसल खराब कर दी। इससे काफी नुकसान हुआ है। नुकसान की भरपाई कराई जाए।
विष्णु प्रसाद रावत, किसान, ग्राम बम्हौरीकलां।
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फसल पर रातों रात मशीनें चला दीं, जिससे खड़ी फसल खराब हो गई। कंपनी को पहले मुआवजा दे, उसके बाद ही खुदाई करे लेकिन उनकी फसलों पर ही मशीनों चलाई जा रही है। कंपनी वाले भी मानने को तैयार नहीं हैं। इससे आक्रोश बढ़ता जा रहा है। -बुंदेल यादव, किसान, ग्राम बरखेरा।
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