तालबेहट। लॉकडाउन में जहां व्यापारी वर्ग अपना व्यापार मंदा होने, कुछ लोग घाटा होने की बात कह रहे हैं, वहीं इस आपदा में भी कुछ लोगों का जमीन खरीदने का मोह कम नहीं हुआ है। तहसील क्षेत्र के लोगों ने लॉकडाउन के बावजूद भारी संख्या में जमीनों के बैनामे कराए। इससे पच्चीस लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष के माह मई की तुलना में थोड़ा कम हैं।
कोरोना वैश्विक बीमारी के चलते पूरे विश्व में दहशत है। देश में इससे संक्रामकों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसके प्रकोप की चेन को समाप्त करने के लिए सरकार ने 24 मार्च को पूरे देश में तीन सप्ताह का लॉकडाउन किया था। इसके बाद सभी सरकारी कार्यालय, विद्यालय, मॉल, बाजार बंद कर दिए गए थे। पूरे देश के उपनिबंधन कार्यालय और शराब की दुकानें बंद होने से सरकार को काफी नुकसान हुआ था। इसके बाद लॉकडाउन का यह समय बढ़ता गया।
इसके बाद शासन ने प्रदेश के उपनिबंधन कार्यालयों में आठ मई से सोशल डिस्टेंस के साथ आरोग्य सेतु एप मोबाइल में डाउनलोड होने की अनिवार्यता सहित कुछ जरूरी नियमों के प्रावधान के तहत बैनामा का कार्य शुरू कराने का निर्देश दिया। लॉकडाउन मेें व्यापार बंद होने एवं घरों से बाहर नहीं निकलने वालों से घाटे होने का राग अलापने वालों ने इस मौके का खूब लाभ उठाया। उन्होंने जरूरतमंद लोगों की मजबूरी का लाभ उठाते हुए जमीनों के बैनामे कराए। इसके चलते लॉकडाउन में भी तहसील क्षेत्र में खूब बैनामे हुए, जो पिछले वर्ष मई माह में हुए बैैनामों की तुलना में कुछ कम रहे।
नियमों को किया दरकिनार
तालबेहट। रजिस्ट्री लेखकों और बैनामा कराने वालों ने सरकार के नियमों को दरकिनार करते हुए अपने नियमों के अनुसार काम किया। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोगों के मोबाइल में आरोग्य सेतु एप डाउनलोड नहीं होने पर उसे अपने मुंशीयों के मोबाइल फोन दे देते हैं। ऐसी स्थिति में क्या कोरोना संक्रामक बीमारी से बचाव संभव है।
सब रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री कराने आने वाले के हाथ धोने के लिए पानी रखा है, परंतु हाथ धोने का साबुन नहीं है। इसके अलावा रजिस्ट्री कराने वाले लोग और कर्मचारी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। बिना मॉस्क के ही कुछ कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।
आठ से 30 मई तक कार्यालय में एक सौ तीस से अधिक बैनामा पंजीकृत हुए। इससे शासन को पच्चीस लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष माह मई की तुलना में लगभग सात लाख रुपये कम है।
- मोहम्मद सादिक, उपनिबंधक तालबेहट