ललितपुर। सूखा के कारण शहर और जिले में हुए पेयजल संकट के कारण अब लोगों को पुराने कुएं और बावरी की याद आने लगी है। शहर में आधा सैकड़ा सार्वजनिक कुए हैं, लेकिन उनका उपयोग नहीं होने से वह कूड़ाघर में तब्दील हो गए है। नगर पालिका ने कुओं की सफाई कराने की बात कही थी, लेकिन अभी तक इस दिशा में पालिका ने एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया है।
पूरा बुंदेलखंड सूखा की चपेट में है। जनपद का शहरी क्षेत्र भी इस मार से अछूता नहीं है। यहां रहने वाले एक लाख से अधिक लोग पानी के लिए कड़ी धूप में पसीना बहाने को मजबूर हैं। इसके बावजूद जरूरत के अनुसार पानी एकत्रित नहीं कर पा रहे हैं। शहर के 26 वार्डों में लगे एक सैकड़ा से अधिक हैंडपंप सूख गए हैं। वर्षों बीतने के बाद भी शहर के करीब 40 प्रतिशत आबादी वाले क्षेत्र में पेयजल की पाइप लाइन की कोई व्यवस्था नहीं है।
शहर के जिन मुहल्लों में पाइप लाइन की सुविधा है, वहां की जनता को काफी हद तक राहत है। लेकिन, बिना पाइप लाइन वाले, पठारी व अपर जोन में बसे मुहल्लों में पीने को पानी नसीब नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में लोगों को प्राचीन कुओं व बावरियों की याद आने लगी है।
शहर में करीब आधा सैकड़ा सार्वजनिक कुएं हैं, लेकिन स्थानीय लोगों व पालिका प्रशासन की लापरवाही के कारण आधे से ज्यादा कुएं कूड़ा घर में तबदील हो गए हैं। जिन कुओं में पानी भरा है, उनमें व्याप्त गंदगी के कारण पानी का उपयोग नहीं हो पा रहा है। आधा दर्जन से अधिक कुएं ऐसे भी हैं, जिन पर अतिक्रमण कर लिया गया है।
कुओं के सहारे बुझाई जा सकती है प्यास
कुओं की यदि सफाई करा दी जाए तो स्थानीय लोगों की पानी की समस्या का काफी हद तक समाधान निकल सकता है। ऐसे कई कुएं हैं, जिनसे पूर्व में मुहल्लों व क्षेत्र में जलापूर्ति की गई है। वार्ड नंबर पांच के मुहल्ला बड़ापुरा में स्थित सरकारी कुएं से पिछले कुछ वर्षों तक मुहल्ला बड़ापुरा, रामनगर, वंशीपुरा आदि इलाकों में जलापूर्ति की गई है। कुएं में पंप डालकर पाइप लाइन से जोड़ दिया गया था, जिससे उक्त मुहल्लों में रहने वाले करीब 5 हजार लोगों को सुबह व शाम को एक-एक घंटे पानी दिया जाता था। लेकिन, सफाई के अभाव में इस कुएं का भी पानी उपयोग के लायक नहीं बचा है। इसी तरह मुहल्ला विष्णुपुरा, नारायणपुरा, नईबस्ती, गांधीनगर, रामनगर व अन्य मुहल्लों के कुएं हैं, जहां पर लोग कुएं का पानी पीने के लिए उपयोग करते थे। लेकिन, गंदगी के कारण अब उपयोग बंद हो गया।
बावड़ी रही है तीन वार्डों का सहारा
वार्ड नंबर 26 के मुहल्ला महावीरपुरा में स्थित नगर पालिका के बालिका इंटर कालेज में एक शताब्दी प्राचीन बावड़ी है। स्थानीय लोग बताते हैं कि यह बावड़ी करीब 150 वर्ष पुरानी है। करीब 10 साल पहले इस इलाके में पेयजल की समस्या हो गई थी, उस दौरान पंप के माध्यम से बावड़ी का पानी तीन वार्डों के मुहल्ला महावीरपुरा, चौबयाना, खिरकापुरा, रैदासपुरा, विष्णुपुरा, नारायणपुरा, दौरीपुरा व अन्य मुहल्लों में जलापूर्ति की जाती थी। यदि यह बावड़ी साफ करा दी जाए तो इस इलाके के 30 हजार से अधिक लोगों की प्यास बुझाने का सहारा बन सकती है।
सार्वजनिक कुएं पर अतिक्रमण
शहर के नझाई बाजार स्थित टाकीज के सामने प्राचीन कुआं बना है, जिसमें वर्तमान में भी पानी भरा हुआ है। इस कुएं के चारों ओर नगर पालिका के अस्थाई दुकानें हैं, जिसका किराया पालिका वसूलती है। चारों ओर दुकानेें होने के कारण अब यह कुआं पूरी तरह से छिप गया है, इस कारण इसका उपयोग भी नहीं हो पाता है। स्थानीय दुकानदारों द्वारा कुएं में गंदगी फेंकी जाती है। कलारी के नीचे करीब 10 वर्ष पूर्व सार्वजनिक कुआं था, जिससे स्थानीय परिवार अपनी प्यास बुझाते थे। लेकिन, अब कुएं को बंद कर उसके ऊपर दुकानों का निर्माण करा दिया गया। वार्ड नंबर 24 में तालाबपुरा मार्ग पर स्थित प्राचीन छतदार कुआं तीनों ओर से हो चुके निर्माण से पूरी तरह से ढक गया है।
यह हैं शहर के सार्वजनिक कुएं
वार्ड नंबर 01 में पांच कुएं हैं, वार्ड नंबर 02 में दो, वार्डनंबर 03 में चार, वार्ड नंबर 04 में एक कुंआ था, जिस पर अब कलारी संचालित हो रही है, वार्ड नंबर 05 में अंग्रेजों के जमाने के दो कुएं, वार्ड नंबर 06 में दो कुएं, वार्ड नंबर 07 में चार कुएं व एक बावड़ी, वार्डनंबर 09 में एक कुंआ, वार्ड नंबर 10 में दो कुएं, वार्ड नंबर 11 में तीन कुएं, वार्ड नंबर 12 में दो कुएं, वार्ड नंबर 13 में तीन कुएं, वार्ड नंबर 15 में दो कुएं, वार्ड नंबर 16 में चार कुएं, वार्ड नंबर 19 नजाई बाजार में एक कुंआ, जिस पर अतिक्रमण है, वार्ड नंबर 20 में पांच कुएं, वार्ड नंबर 22 में दो कुएं, वार्ड नंबर 24 में दो कुएं, दोनों पर अतिक्रमण, वार्ड नंबर 25 में पांच व वार्ड नंबर 26 में दो हैंडपंप व एक प्राचीन बावड़ी स्थित है।
दस दिन बाद भी शुरू नहीं हो सकी सफाई
11 अप्रैल को नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ पेयजल की समस्या के समाधान के संबंध में बैठक की थी। इस दौरान पालिकाध्यक्ष ने अवर अभियंता विपिन कुमार को सार्वजनिक कुओं की सफाई कराने के निर्देश दिए थे। इनमें मुहल्ला नझाई बाजार में ललित टाकीज के सामने, तालाबपुरा में छतदार कुंआ, गांधीनगर में पुरानी पुलिस चौकी के पास स्थित ग्रामसभा के नाम से प्रचलित कुंआ, बूढ़े बाबा के पास स्थित कुंआ, तथा रावरपुरा में नगर पालिका बालिका इंटर कॉलेज स्थित बावड़ी शमिल है। लेकिन, 10 दिन से अधिक बीतने के बाद भी कुओं की सफाई कराने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
पेयजल के समाधान की समीक्षा
शुक्रवार को नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल की अध्यक्षता व प्रभारी अधिशासी अधिकारी अनिल कुमार अरुण की उपस्थित में पेयजल के समाधान की समीक्षा बैठक हई। इस दौरान उन्होंने अवर अभियंता से कुओं की सफाई के बारे में जानकारी प्राप्त की। लेकिन, वह संतोषजनक जबाव नहीं दे सके। इस पर अवर अभियंता को फटकार लगाई गई। उन्होंने नगर के सार्वजनिक स्थलों पर लगाई जाने वाली 18 प्याऊ के बारे में समीक्षा की तो लिपिक हबीब खान द्वारा कार्य पूर्ण होना बताया गया।
सफाई को 11 लाख रुपए हुए थे स्वीकृत
वार्ड नंबर 24 की महिला पार्षद रागिनी समैया द्वारा गत 28 जनवरी 2013 में नगर के सभी सार्वजनिक कुओं की सफाई व मरम्मत के लिए प्रस्ताव रखा था। तत्कालीन अपर जिलाधिकारी महेश प्रसाद/ प्रभारी अधिशासी अधिकारी के निर्देश पर अवर अभियंता ने नगर के सभी कुओं की सफाई और मरम्मत के लिए 11लाख रुपए का स्टीमेट तैयार किया था। 29 मई 2013 को आयोजित बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया था, बोर्ड ने प्रस्ताव संख्या 372 को स्वीकृति दे दी थी। बोर्ड की स्वीकृति मिले लगभग तीन वर्ष बीत गए हैं, लेकिन नगर पालिका द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।