संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। नशा हंसते-खेलते परिवार को भी तबाह कर देता है। इसकी लत घर के कोई एक व्यक्ति को होती है, लेकिन असर पूरे परिवार पर पड़ता है। महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े जिलों में शुमार ललितपुर में शराब पीने वालों की तादाद काफी है। यहां के लोग प्रतिदिन लाखों रुपये शराब पर खर्च कर रहे हैं। इससे अपनी सेहत खराब करने के साथ परिवार भी तबाह कर रहे हैं।
उद्योग शून्य होने के चलते यहां के लोग कृषि व मजदूरी पर आश्रित हैं। लेकिन, शराब का प्रचलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। इसका कारण जगह-जगह सरकारी ठेका खुलना और कुटीर उद्योग के रूप में स्थापित हो चुका कच्ची शराब का धंधा है। आसानी से शराब उपलब्ध हो जाने के कारण लोग शराब के लती हो चुके हैं और प्रतिदिन करीब एक करोड़ रुपया इस पर खर्च कर रहे हैं।
आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वित्तीय वर्ष में शासन ने 360 करोड़ रुपये राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया था। दिसंबर तक 220 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल कर लिया गया। इस प्रकार जिले में प्रतिदिन लाखों रुपये की शराब बिकती है। कच्ची शराब की बिक्री भी लाखों में होती है। कच्ची शराब के खिलाफ आबकारी और पुलिस विभाग लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई करती है। इस वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग ने 4500 छापामार कार्रवाई की। 650 मुकदमे दर्ज कराए और 25 हजार लीटर कच्ची शराब बरामद करते हुए एक लाख किलोग्राम लहन नष्ट किया। बावजूद इसके कच्ची शराब की बिक्री पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
शराब कारोबार पर एक नजर
- 94 दुकानें देसी शराब की
- 40 दुकानें अंग्रेजी शराब की
- 30 दुकानें बीयर की
- 5 मॉडल शॉप की
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शराब के खिलाफ महिलाएं बुलंद कर रहीं आवाज
परिवार में किसी के शराब पीने से सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाएं होती हैं। नशे में लोग इनके साथ मारपीट करते हैं, घर में रखा अनाज व अन्य सामान तक बेच देते हैं। इसे देखते हुए अब ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं शराब के खिलाफ आवाज बुलंद करने लगी हैं। 20 नवंबर को बानपुर के ग्राम सुनवाहा की महिलाओं ने ठेका हटाने के लिए प्रदर्शन किया था। 21 दिसंबर को शहर के मोहल्ला रामनगर से ठेका हटाने, 31 दिसंबर को थाना बार के ग्राम भैलोनी लोध और हाल में सिंदवाहा की महिलाओं ने गांव से शराब की दुकान हटाने को लेकर मुख्यालय पर प्रदर्शन किया था।
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कच्ची शराब के लिए कुख्यात है कबूतरा डेरा : कच्ची शराब कुटीर उद्योग का रूप ले चुकी है। इसका कारण यहां कबूतरा डेरा का होना है। जिले में कबूतरा डेरा चीरा, मऊमाफी, घटवार कबूतरा डेरा, कबूतरा डेरा रजौरा, कबूतरा डेरा उगरपुर, कबूतरा डेरा उडवांताल सहित अन्य क्षेत्रों में भी कबूतरा डेरा है। इन डेरों पर कच्ची शराब का निर्माण किया जाता है।
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जिले में सरकारी शराब की 169 दुकानें संचालित हैं। इस वित्तीय वर्ष में 360 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया था। 220 करोड़ रुपये दिसंबर तक हासिल कर लिया है। कच्ची शराब के खिलाफ इस वर्ष 4500 छापामार कार्रवाई की गई। 25 हजार लीटर कच्ची शराब बरामद की। 650 मुकदमे दर्ज कराए।
विजय सिद्धांत, जिला आबकारी अधिकारी