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वृद्ध की हत्या में समधी को आजीवन कारावास

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ललितपुर। अपर जिला और सत्र न्यायाधीश (प्रथम) उमेश कुमार सिरोही की अदालत ने दो वर्ष पूर्व ग्राम महर्रा में वृद्ध की कुल्हाड़ी मारकर हत्या का दोष सिद्ध होने पर मृतक के समधी को आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। शहर कोतवाली अंतर्गत ग्राम महर्रा निवासी धर्मदास पुत्र हरप्रसाद विश्वकर्मा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि 19 मार्च 2018 की शाम को सात बजे मेरे पिता हरप्रसाद (88) पुत्र दुल्ले व मेरे भाई राजेश के ससुर मध्यप्रदेश के जिला विदिशा अंतर्गत ग्राम गंजबासौदा निवासी चतुर पुत्र रामचरन खाना खाकर एक ही कमरे में अलग-अलग चारपाई पर लेटे हुए थे। 19/20 मार्च की रात्रि करीब दो बजे चतुर ने कुल्हाड़ी से हमला कर पिता को गंभीर रूप से घायल कर दिया। पिता के चिल्लाने पर हम व बगल के कमरे में सो रही मेरी बहू माया पत्नी जयद्रथ मौके पर पहुंचे तो देखा की पिता हरप्रसाद ने दम तोड़ दिया। चतुर ने मौके पर कुल्हाड़ी फेंकी और सड़क की ओर भागा। हम लोगों ने दौड़कर पकड़ लिया। चतुर ने बताया कि हरप्रसाद ने हमारी जायजाद हड़प ली है, इस कारण मैने उसकी कुल्हाड़ी मारकर हत्या कर दी। मौके पर कई लोग आ गए चतुर को पकड़कर कोतवाली लाया गया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
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मंगलवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने हत्या के मामले में समधी चतुर को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले की पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी ने की।
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