संवाद न्यूज एजेंसी
सिलावन (ललितपुर)। ग्राम किसरदा स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथाव्यास पंडित रमाकांत द्विवेदी ने ध्रुव चरित्र और शिव-पार्वती विवाह की कथा का वर्णन किया।
कथाव्यास ने कपिल अवतार, ध्रुव चरित्र, सृष्टि की रचना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति में अधिक से अधिक समय देना चाहिए। कथाव्यास ने शिव-पार्वती विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि विवाह एक पवित्र संस्कार है, लेकिन आधुनिक समय में लोग संस्कारों से दूर भाग रहे हैं। जैसे जीव के बिना शरीर निरर्थक होता है, ऐसे ही संस्कारों के बिना जीवन का कोई मूल्य नहीं होता।
भक्ति में दिखावा नहीं होना चाहिए। माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तीन हजार सालों तक तपस्या की। इसके बाद भगवान शिव का विवाह पार्वती के साथ हुआ था। भगवान शिव और माता पार्वती के स्वरूपों के विवाह के दौरान श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। महिलाओं ने मंगल गीत गाए। मुख्य यजमान श्यामा और देवीसिंह ने विवाह की रस्म पूरी कर महाआरती की।