मार्च-2016 में स्वीकृत ललितपुर रोडवेज डिपो का संचालन लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। 10 वर्ष बाद भी यह शुरू नहीं हो सका। लागत भी बढ़कर दोगुनी से अधिक हो गई, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ललितपुर जनपद में परिवहन निगम का कोई डिपो नहीं था। इसकी मांग कई वर्षों से चली आ रही थी। मार्च-2016 में इसके निर्माण की नींव रखी गई। यह कार्य जनवरी 2018 में पूर्ण करना था, लेकिन बार-बार इसके समय में बढ़ोतरी की गई। 10 वर्ष से अधिक गुजर चुके, लेकिन रोडवेज डिपो का कार्य अब भी लंबित है। निर्माण की लागत बढ़कर दोगुनी यानी कि 10 करोड़ से अधिक हो गई है, जबकि शुरुआत में रोडवेज डिपो का बजट 4.99 करोड़ रुपये निर्धारित था।
ललितपुर से प्रतिदिन 10000 सवारियों का होता है आवागमन
ललितपुर से प्रतिदिन करीब 10 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। झांसी, इंदौर, दतिया, टीकमगढ़, सागर, अशोकनगर, ओरछा, ग्वालियर के साथ आसपास के अन्य क्षेत्रों में यात्रियों का आना जाना होता है। ललितपुर में 150 निजी बसों का संचालन होता है। रोडवेज की भी कुछ बसें हैं, जिनसे यात्री आते-जाते हैं।
चार बार बदली गई निर्माण की अवधि
स्वीकृति के समय निर्माण पूर्ण होने की तिथि जनवरी 2018 तय की गई थी।
निर्माण समय से पूर्ण न होने के चलते इसे जुलाई 2018 तक बढ़ाया गया।
अगली तिथि मार्च 2019 और इसके बाद जून तय किया गया।
डिपो में यह हुआ निर्माण
परिवहन निगम का कार्यालय
वर्कशॉप
बस स्टॉप
कैंटीन
डीजल पंप
यात्रियों के लिए शेड
परमिट मिलते ही शुरू किया जाएगा बसों का संचालन
परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि ललितपुर रोडवेज के संचालन के लिए सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं। बसों का परमिट मिलना शेष है। जैसे ही परमिट प्राप्त होंगे, मुख्यालय से मंजूरी लेने के बाद रोडवेज का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।