नगर कोआदर्श रेलवे स्टेशन का दर्जा तो दे दिया पर साफ-सफाई का अभाव है। परिसर में यहां-वहां गंदगी फैली नजर आती है, जिससे आदर्श स्टेशन की कल्पना साकार नहीं हो पा रही है।
रेल मंत्रालय ने जब इसे आदर्श स्टेशन का दर्जा दिया था तो इस क्षेत्र के लोगों की उम्मीद जागी थी कि स्टेशन पर बेहतर सुविधाएं हो जाएंगी व इसकी स्वच्छता पर भी ध्यान दिया जाएगा। लेकिन, ऐसा हो नहीं सका है। अधिकारियों द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। इसके चलते स्टेशन परिसर के मुख्य द्वार के सामने ही खुले में ही कचरा डाला जा रहा है। इससे वहां पर गंदगी पड़ी रहती है। साथ ही इस ओर किसी भी अधिकारी व कर्मचारी ने सफाई करवाए जाने की जिम्मेदारी समझी है। इस कारण ही स्टेशन परिसर के पास कचरा पड़ा रहता है। रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार से निकलते ही शहर की ओर जाने वाले रास्ते व जीआरपी थाने के पीछे भारी गंदगी पड़ी रहती है।
जीआरपी थाने के ठीक सामने भी कचरा पड़ा रहता है, जहां लोग गेट खुला होने के कारण सीधे स्टेशन के प्लेटफार्म पर पहुंच जाते हैं, वहां पर भी कचरा पड़ा रहता है। इसी गंदगी के कारण लोगों को स्टेशन के बाहर ठहरना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद भी अधिकारी व कर्मचारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन लगभग 50 से अधिक गाड़ियां रुकती हैं। इनमें पैसेंजर एक्सप्रेस, सुपर फास्ट व शताब्दी शामिल हैं। स्टेशन पर 24 घंटे में शहर व दूर दराज गांव के लगभग हजारों यात्रियों का आवागमन होता है, लेकिन स्टेशन के मुख्यद्वार के गेट के व जीआरपी थाने के बीच में रुकना मुश्किल होता है।
नगर पालिका से समन्वय स्थापित करेंगे
रेलवे स्टेशन परिसर में कचरा अधिक होने की बात सामने आ रही है। जिसे नगर पालिका परिषद के साथ मिलकर साफ कराया जाएगा। इस तरह परिसर की लगातार सफाई कराई जाएगी। ताकि दोबारा गंदगी न हो।
-नीरज भटनागर, पीआरओ रेलवे