आरोपी की ओर से अदालत में हृदय रोग और मधुमेह से पीड़ित होने की जानकारी दी गई। इस पर अदालत ने सीएमओ को टीम गठित कर प्रत्येक दिन जिला कारागार में उसका चिकित्सीय परीक्षण करने के आदेश दिए हैं।
मेडिकल कॉलेज में अपने बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता के नाम से नौकरी कर रहे फर्जी चिकित्सक अभिनव सिंह की जमानत याचिका बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने निरस्त कर दी है। आरोपी मेडिकल कॉलेज में तैनाती के दौरान हार्ट के मरीजों का उपचार करता रहा।
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आरोपी की ओर से अदालत में हृदय रोग और मधुमेह से पीड़ित होने की जानकारी दी गई। इस पर अदालत ने सीएमओ को टीम गठित कर प्रत्येक दिन जिला कारागार में उसका चिकित्सीय परीक्षण करने के आदेश दिए। कोतवाली अंतर्गत मोहल्ला तालाबपुरा निवासी अभिनव सिंह की ओर से अदालत में जमानत याचिका प्रस्तुत की गई। उसमें बताया गया कि वह निर्दोष है और उसे पारिवारिक रंजिश व संपत्ति विवाद के कारण झूठा फंसाया गया है।12 दिसंबर 2025 से वह जिला कारागार में निरुद्ध है। विगत 20 वर्षों से वह टाइप-1 मधुमेह व हृदय रोग से ग्रसित होने के कारण सघन इंसुलिन थेरेपी पर निर्भर है। उसे पड़ने वाला हाइपोग्लाइसीमिया का दौरा जानलेवा है, जिसकी निगरानी जेल में संभव नहीं है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मयंक कुमार जायसवाल की अदालत ने आरोपी की चिकित्सीय स्थिति को देखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी को आदेश दिया कि वह चिकित्सीय टीम का गठन करें, जो प्रत्येक दिन जिला कारागार में जाकर आरोपी का रोजाना परीक्षण करें। न्यायालय ने आरोपी की जमानत याचिका निरस्त कर दी।