जनपद में तेज रफ्तार बसों के चलते कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बस चालक सड़क किनारे पड़ने वाले गांवों में भी रफ्तार कम नहीं करते। उन्होंने गांव की सीमा में बसों की रफ्तार पर लगाम लगाने की मांग की है।
सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ रही बसें दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। रफ्तार अधिक होने के चलते चालक बस से अपना नियंत्रण खो देते जो दुर्घटना का कारण बनता है। आए दिन हो रही दुर्घटनाओं से कई परिवार उजड़ रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि हादसे के बाद कुछ दिन सख्ती रहती है लेकिन बाद में स्थित जस की तस हो जाती है। इसके चलते न सिर्फ राहगीर बल्कि पशुओं को भी खतरा बना रहता है। बस चालकों को कई बार रफ्तार कम करने को कहा जाता है किंतु वह नहीं मानते हैं। ग्रामीणों ने तेज रफ्तार बसों पर लगाम लगाने की मांग की है।
हादसों पर एक नजर
घटना एक- 9 जुलाई को ललितपुर से महरौनी की ओर जा रही तेज रफ्तार बस ने ग्राम पटसेमरा के पास सड़क किनारे खड़े बाइक चालक बाबू सहरिया (32) को टक्कर मार दी जिससे उसकी मौत हो गई थी।
घटना दो- 29 सितंबर को ललितपुर से टीकमगढ़ की ओर जा रही बस की रफ्तार अधिक होने के चलते छिल्ला के समीप सड़क पर अचानक से गिरे बाइक चालक को बचाने के प्रयास में बस चालक के नियंत्रण से बाहर हो गई और बस पेड़ से टकरा गई बस की रफ्तार इतनी अधिक थी की विशालकाय पेड़ गिर गया था। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार बस की रफ्तार तेज नहीं होती तो यह हादसा नहीं होता।
घटना तीन- 8 अक्तूबर को तेज रफ्तार बस ने ग्राम किसरदा के पास बैजनाथ गांव निवासी बाइक चालक हरदेव सिंह ( 45) को टक्कर मार दी जिसके चलते उसकी मौत हो गई थी।
घटना चार- 10 अक्तूबर को भी हाईवे पर तेज रफ्तार बस ने दो महिलाओं के सुहाग उजाड़ दिए। इस दुर्घटना में बिरधा निवासी गंगाराम और राजेश की मौत हो गई थी।
घटना पांच- सोमवार रात्रि को मड़ावरा में तेज रफ्तार बस ने बाइक में टक्कर मार दी इससे बाइक सवार तीन युवकों की मौत हो गई।
यह बोले ग्रामीण
सडक किनारे बसे गांव से भी निकलने के दौरान बस चालक रफ्तार कम नहीं करते इससे गांव में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है| कई बार बस चालकों से रफ्तार कम करने की बात कही गई।
प्रान सिंह, ग्राम प्रधान समोगर
तेज रफ्तार बसें दुर्घटनाओं का कारण बन रही है| आए दिन हो रही दुर्घटनाओं से कई परिवार उजड़ गए। जानवर भी दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। इस पर कार्रवाई कर लगाम लगाना चाहिए।
धनीराम वर्मा