परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को शीघ्र ही प्रयोगशाला में प्रयोग करने का अवसर मिल सकेगा। शासन ने प्रत्येक विकासखंड में दो-दो लैब खोलने के लिए धनराशि अवमुक्त कर दी है। इससे पूर्व माध्यमिक स्कूलों में लैब की सुविधा उपलब्ध होने का रास्ता साफ हो गया है।
परिषदीय शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के निरंतर प्रयास हो रहे हैं। जहां शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर उन्हें शिक्षण के नए-नए गुर सिखाए जा रहे हैं। विशेषकर विज्ञान, गणित विषय पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। स्कूलों में विज्ञान विषय पढ़ाने के लिए पृथक से विज्ञान शिक्षक की तैनाती की गई है। वहीं, अब स्कूलों में प्रयोगशाला खोलने का निर्णय लिया गया है। शुरुआत में हर विकासखंड में दो लैब खोली जाएगी। इनमें से एक बीआरसी के समीप स्कूल में व दूसरी लैब ब्लाक के किसी भी स्कूल में खोलने का प्रस्ताव किया गया है। इस तरह जिले में 14 लैब बनाई जाएगी। शासन ने 45 हजार रुपये के हिसाब से धनराशि भी अवमुक्त कर दी है। प्रयोगशाला बीआरसी के निकट के स्कूल में बनाने के पीछे मकसद उसके रखरखाव पर ध्यान देना है। जिला समन्वयक प्रशिक्षण कमलेश कुमार का कहना है कि प्रयोगशाला पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अतिरिक्त कक्षा कक्ष में बनाई जाएगी। स्कूलों का चयन बीएसए द्वारा किया जाएगा। वहीं, सामग्री की सूची राज्य परियोजना कार्यालय से उपलब्ध कराई जाएगी। इसी सत्र में प्रयोगशाला स्कूलों में बनकर तैयार हो जाएगी।
शिक्षकों की तैनाती में मनमानी
एक तरफ शासन विज्ञान विषय में रुचिपरक बनाने के लिए भरसक प्रयास कर रही है। वहीं, स्थानीय स्तर पर विज्ञान शिक्षा का मखौल उड़ाया जा रहा है। विज्ञान शिक्षकों की तैनाती इसका उदाहरण है। दूरदराज के विद्यालयों में विज्ञान शिक्षकों की तैनाती नहीं हो पा रही है जबकि जनपद मुख्यालय, ब्लाक मुख्यालय व सड़क किनारे के स्कूलों में एक से अधिक विज्ञान शिक्षकों की नियुक्ति हो गई है। ऐसे में प्रयोगशाला खोलने की मंशा सार्थक हो पाती है या नहीं, यह सवाल लोगों के जेहन में कौंध रहा है।