ललितपुर। बुंदेलखंड के दमोह जिले में स्थित जैन तीर्थ कुंडलपुर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का सोमवार को घटयात्रा के साथ आगाज हो गया। एक ओर कुंडलपुर में जहां बड़े बाबा भगवान आदिनाथ और छोटे बाबा आचार्य विद्यासागर महाराज के जयकारे गूंजे, तो दूसरी ओर ललितपुर में भी महोत्सव को लेकर धूम रही।
महोत्सव में पहले दिन घटयात्रा के साथ ही मुख्य पांडाल में जाप स्थापना आचार्यश्री का पूजन और भगवान के माता पिता बने पात्रों की गोद भराई की गई। वहीं पंचकल्याणक में प्रतिमा प्रतिष्ठा के लिए जनपद निवासी विमल चंद, ऋषभ जैन ने कहा कि उनके परिवार ने पंचकल्याणक के लिए जयपुर राजस्थान से भगवान पार्श्वनाथ की पाषाण एवं भगवान मुनिसुव्रतनाथ की धातु की प्रतिमा तैयार करवाकर लाए जिसको आचार्य श्री के सानिध्य में कुंडलपुर में प्रतिष्ठा कराने का सौभाग्य मिला। वहीं शहर के मुहल्ला मउठाना निवासी उत्तम चंद जैन के पुत्र पंकज जैन सुनवाहा को लौकांतिक देव बनने का सौभाग्य मिला है। इसके साथ ही शहर के प्रमुख ब्रह्मचारी मनोज, भूपेंद्र, अमित, आनंद, अन्नू एवं ब्रह्मचारिणी सीमा, मीना, नीता, मंजू सहित अनेकों बहनों के साथ अनवरत रूप सेवा कर अनुकरणीय पुर्ण्याजन कर रहे हैं।
पंचायत के मीडिया प्रभारी अक्षय अलया ने बताया कि आयोजन 24 फरवरी तक चलेगा। इस आयोजन को लेकर ललितपुर में जैन समाज में खासा उत्साह है।
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में लौकांतिक देव बनने का जो पुर्ण्याजन हुआ है, उससे मेरा जीवन धन्य हुआ है।- पंकज जैन
जनपद के त्यागी वृति श्रावक आचार्य विद्यासागर महाराज एवं उनके संघस्थ साधु-साध्वियों की आहार, वैयावृत्ति सेवा में सम्मिलित होकर पुर्ण्याजन कर रहे हैं।-मनोज जैन, बबीना, संयोजक धार्मिक आयोजन
मैने अपने जीवन में इतने साधु-संत एक साथ नहीं देखे। इस समय ऐसा लग रहा है मानो भगवान का समवशरण कुंडलपुर में लगा हो जिसका साक्षात दर्शन कर रहे हैं।-संजीव जैन, जैन पंचायत के शिक्षा मंत्री
कुंडलपुर के बडे बाबा जन-जन के आराध्य हैं। बडे बाबा को अपने स्थान पर विराजमान करने में ललितपुर के 700 से अधिक स्वयंसेवकों ने कारसेवा कर अनुकरणीय योगदान दिया, जो अनूठा रहा।-नरेंद्र कडंकी, अध्यक्ष वीर व्यायामशाला
बडे बाबा और गुरू चरणों की धूल जिसको माथे पर लगाकर जन्म जन्मों के पापों का क्षय होता है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में वह लोग सौभाग्यशाली है जिन्होंने पात्रों के रूप में चयनित होकर पुर्ण्याजन किया।-राजेंद्र जैन थनवारा