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किसान दिवस को लेकर अन्नदाताओं में नहीं उत्साह

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ललितपुर। किसान दिवस को लेकर क्षेत्रीय किसानों में तनिक भी उत्साह दिखाई नहीं दे रहा है। इसकी मुख्य वजह जिले के अधिकांश किसान कर्ज के तले दबे हैं, साथ ही उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।
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पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती (23 दिसंबर) पर किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन बुंदेलखंड के अति पिछड़े जनपद के किसानों की हालत आज भी बद से बदतर है। अपात्रों से यहां के किसानों को विभिन्न योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। यही कारण है कि किसान कर्जदार होते जा रहे हैं।
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यह है सम्मान निधि का हाल
जिले में दो लाख 43 हजार किसान कृषि विभाग में पंजीकृत हैं। किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत वर्ष में तीन किश्तों में दो-दो हजार रुपये मिलते हैं। लेकिन विभाग में पंजीकृत किसानों में 30 हजार से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सम्मान निधि से वंचित किसानों में कई तो ऐसे हैं, जिन्हें किसान सम्मान निधि न मिलने का कारण तक पता नहीं है। जबकि हजारों किसान अब तक पंजीकृत तक नहीं हो सके है।
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बीमा क्लेम को भटक रहे 10 हजार किसान
केंद्र सरकार द्वारा किसानों को आपदाओं से होने वाले नुकसान से राहत देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित की गई है। जिसमें बीमित फसलों में नुकसान बीमा कंपनी द्वारा दिया जाता है। यहां किसानों ने फसलों का बीमा तो कराया, लेकिन नुकसान का क्लेम अब तक नहीं मिल सका है। वर्ष 2018 में अतिवृष्टि से नष्ट हुई फसल का चार हजार किसानों को बीमा क्लेम नहीं मिल पाया है। वहीं वर्ष 2019 में अतिवृष्टि से खरीफ की फसल नष्ट हुई। जिसमें अब तक लगभग 15 हजार किसानों केे बीमा क्लेम नहीं मिल सका है।
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इतने किसान हैं कर्जदार
जनपद में कृषि विभाग द्वारा किसान हितैषी तमाम योजनाएं संचालित की जा रही है। इसके बाद भी किसान लगातार कर्ज में डूबता जा रहा है। यहां पर डेढ़ लाख से अधिक किसान एक करोड़ सात लाख रुपये के कर्जदार बैंकों के हैं। वहीं दस लाख रुपए साहूकारों के कर्ज तले दबे हैं।
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वर्ष 2019 में खरीफ की पूरी फसल नष्ट हो गई थी। बीमा होने के बाद भी क्लेम नहीं मिल सका है। जगभान रजक
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फसलों से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कराया, लेकिन कोई लाभ नहीं मिल सका है। शिन्नाम बरार
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बीमा क्लेम के लिए कृषि विभाग, बैंक व बीमा कंपनी तीन जगह आजकल कहकर टाला जा रहा है। रामकिशोर
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किसान सम्मान निधि के लिए एक वर्ष पहले आवेदन किया, लेकिन अब तक किश्त नहीं मिल सकी है। अरजन विश्कर्मा
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किसानों को लगातार योजनाओं के लाभ का प्रयास किया जा रहा है। बीमा क्लेम से वंचित किसानों का डाटा जुटाया जा रहा है। वहीं सम्मान निधि की सूची आने पर सुधार कर डाटा अपलोड किया जाता है।
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संतोष कुमार सविता, उप कृषि निदेशक
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