नगर एवं समीपस्थ ग्राम कड़ेसराकलां में असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक दहशरा पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। इस मौके पर भगवान की शोभायात्रा निकाली गई। नगर में यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। वहीं, देर रात मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे। असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक दशहरे पर नगर के लोगों में काफी उत्साह था। सायंकाल नगर के प्रमुख रघुनाथ मंदिर, बालाजी मंदिर, रामजानकी मंदिर खांदी, ध्रुवकुटी मंदिर से भगवान के विमान लंका पहुंचे, जहां पूजन के बाद रावण रूपी असुरी शक्ति का वध किया गया। लंका विजय के बाद चारों विमानों की उपजिलाधिकारी आजाद भगत सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी, नगर पंचायत अध्यक्ष मुक्ता सोनी, अनिल अड़जरिया ने आरती उतारी। इसके बाद विमानों ने नगर के लिए प्रस्थान किया। इनकी नगर में जगह- जगह जोरदार आरती उतारी गई। इसके बाद देर रात मंदिरों में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम एवं प्रसाद वितरण हुआ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आलोक पाठक, राकेश द्विवेदी, सतीश अगरिया, आशीष पंडा, रामनारायण पाठक, विजय सोनी का सक्रिय सहयोग रहा। कड़ेसराकलां में भी दशहरा मैदान पर पहले रावण के पुतले का दहन किया गया। इसके बाद भगवान राम के विमान गांव में भ्रमण करते हुए मंदिर आए, जहां प्रसाद वितरण कार्यक्रम हुआ। इस मौके पर रावण के पुतले का दहन देखने तालबेहट से भी बच्चे आए।
लंका मैदान पर इस बार नहीं जला रावण का पुतला
तालबेहट। नगर पंचायत द्वारा इस बार लंका मैदान पर रावण के पुतले का दहन न कराए जाने से नगर एवं सैन्य क्षेत्र से पुतले का दहन देखने आए लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा। बताते चलें कि रावण दहन को देखने के लिए हर बार सैन्य क्षेत्र से काफी संख्या में लोग आते थे।